पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में शनिवार (30 मई 2026) को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर कथित तौर पर हमला हुआ है। चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीड़ितों से मिलने पहुंचे अभिषेक बनर्जी के काफिले पर प्रदर्शनकारियों ने अंडे, पत्थर और ईंटें फेंकीं।
इस घटना के दौरान प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ ‘चोर-चोर’ के नारे भी लगाए[1]। सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह उन्हें हेलमेट पहनाकर सुरक्षित बाहर निकाला। हमले में घायल होने के बाद अभिषेक बनर्जी को इलाज के लिए कोलकाता के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
1. हेलमेट ने बचाई जान, चश्मा टूटा और कपड़े फटे
सोनारपुर में हुए इस हमले की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। घटना के बाद मीडिया से बातचीत में अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह पूरा हमला पूर्व-नियोजित और सुनियोजित था।
हेलमेट से बची जान: अभिषेक बनर्जी ने कहा, “मेरा सिर किसी तरह बच गया क्योंकि गनीमत यह थी कि मैंने हेलमेट पहन रखा था। हालांकि, उन्होंने मेरे कपड़े फाड़ दिए और मेरा चश्मा भी तोड़ दिया।”
पहले से जुटे थे हुड़दंगी: उन्होंने दावा किया कि पास के एक कम्युनिटी हॉल में सुबह 11 बजे से ही उपद्रवियों को पत्थरबाजी करने के लिए इकट्ठा किया गया था।
सुरक्षा में चूक का आरोप: टीएमसी सांसद का कहना है कि पुलिस को उनके इस दौरे की जानकारी ईमेल के जरिए पहले ही दे दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद मौके पर पुलिसकर्मियों की भारी कमी थी।
2. ‘रूलर्स बने किलर्स’ – ममता बनर्जी का तीखा पलटवार
अभिषेक बनर्जी पर हमले की खबर मिलते ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तुरंत कोलकाता के अपोलो अस्पताल पहुंचीं और उनका हालचाल जाना। मुख्यमंत्री ने इस घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है।
ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “शासक ही अब हत्यारे बन चुके हैं – बीजेपी, तुम्हें शर्म आनी चाहिए।” तृणमूल कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह हमला बीजेपी समर्थकों द्वारा प्रायोजित था, जिसका मकसद अभिषेक बनर्जी को गंभीर चोट पहुंचाना था।
3. राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक घमासान: विपक्ष ने की निंदा
इस हमले के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा कि देश की दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के लोकसभा नेता की सुरक्षा आखिर किस आधार पर वापस ली गई थी?
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा, “सोनारपुर में चुनाव बाद हुई हिंसा के पीड़ितों से मिलने गए सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए चौंकाने वाले हमले की मैं कड़ी निंदा करता हूँ।” खड़गे ने आरोप लगाया कि एक प्रमुख विपक्षी नेता को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा न देना बदले की राजनीति को दर्शाता है।
पाठकों और समाज पर प्रभाव (Reader Impact)
पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की राजनीतिक हिंसा एक बार फिर मुख्यधारा की राष्ट्रीय चर्चा में आ गई है। इस घटना से स्पष्ट है कि राज्य में टीएमसी और बीजेपी के बीच जमीनी स्तर पर राजनीतिक तनाव चरम पर है। आम लोगों और स्थानीय निवासियों के लिए कानून व्यवस्था एक बड़ा सवाल बन गई है, क्योंकि राजनीतिक संघर्षों के बीच आम नागरिकों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है।
अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में हुआ हमला बंगाल की राजनीति में जारी कड़वाहट और तनातनी का एक और बड़ा उदाहरण है। जहां टीएमसी इसे बीजेपी की एक सोची-समझी साजिश बता रही है, वहीं विपक्ष इसे स्थानीय स्तर पर जन आक्रोश का नतीजा कह रहा है। फिलहाल, अभिषेक बनर्जी कोलकाता के अपोलो अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में हैं, और केंद्रीय सुरक्षा बल व स्थानीय पुलिस द्वारा उन्हें इलाके से सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है। आने वाले दिनों में इस मामले के कोर्ट और राज्यपाल के पास पहुंचने की पूरी संभावना है।
FAQ
Q1: अभिषेक बनर्जी पर हमला कहाँ और कब हुआ?
Ans: तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी पर यह हमला शनिवार, 30 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के सोनारपुर इलाके में हुआ, जब वे चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीड़ित परिवारों से मिलने गए थे।
Q2: हमले के दौरान अभिषेक बनर्जी को गंभीर चोटों से किसने बचाया?
Ans: खुद अभिषेक बनर्जी के अनुसार, हमले के वक्त सुरक्षाकर्मियों द्वारा उन्हें हेलमेट पहनाया गया था, जिसने उनके सिर पर होने वाली किसी बड़ी और जानलेवा चोट से उनका बचाव किया। हालांकि, इस दौरान उनके कपड़े फट गए और चश्मा टूट गया।
Q3: इस हमले पर टीएमसी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की क्या प्रतिक्रिया रही?
Ans: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस हमले की निंदा करते हुए बीजेपी को घेरा। वहीं, राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक का आरोप लगाते हुए इस घटना को बदले की राजनीति करार दिया।





