Rahul Gandhi Leader of Opposition: देश की संसद (Parliament) इन दिनों सिर्फ बहसों का नहीं, बल्कि कड़े आरोपों और प्रत्यारोपों का अखाड़ा बन चुकी है। एक तरफ विपक्ष सरकार से अलग-अलग मुद्दों पर जवाब मांग रहा है, तो दूसरी तरफ सत्ताधारी पार्टी (BJP) ने सीधे विपक्ष के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी पर ही करारा हमला बोल दिया है।
झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने राहुल गांधी पर कुछ ऐसे गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनसे दिल्ली की सियासत में भूचाल आ गया है। उन्होंने न सिर्फ राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह तक दावा कर दिया है कि बीजेपी जल्द ही उन्हें ‘लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष’ (Leader of Opposition) के पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव ला सकती है। आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर क्या-क्या आरोप लगाए हैं और इस पूरे बवाल की असल जड़ क्या है।
राहुल गांधी पर बीजेपी का बड़ा वार: ‘विपक्ष के नेता पद से हटाने की तैयारी’
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) एक बहुत बड़ा और जिम्मेदार पद होता है। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे का मानना है कि राहुल गांधी इस पद की गरिमा के हिसाब से काम नहीं कर रहे हैं।
दुबे ने दावा किया है कि बीजेपी जल्द ही राहुल गांधी को इस पद से हटाने के लिए संसद में एक प्रस्ताव (Resolution) पेश करने की कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष का नेता जब विदेश जाता है, तो उसे देश और सरकार की नीतियों के बारे में बात करनी चाहिए। लेकिन राहुल गांधी जब भी विदेश जाते हैं, तो वे सिर्फ देश, सरकार और संविधान के खिलाफ ही बोलते हैं। उनकी इसी कार्यप्रणाली को आधार बनाकर बीजेपी उनकी जवाबदेही तय करना चाहती है।
22 साल की विदेश यात्राओं पर उठे सवाल (2004-2026)
निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर बहुत बड़ा संदेह जताया है। उन्होंने कहा कि साल 2004 से लेकर 2026 तक यानी पिछले 22 सालों में राहुल गांधी ने जितनी भी विदेश यात्राएं की हैं, उनके बारे में किसी को कुछ नहीं पता है।
वे विदेश में किससे मिलते हैं, वहां क्या करते हैं और देश में किस तरह के आंदोलनों को फंड (पैसा) देने की बात करते हैं, यह सब एक रहस्य बना हुआ है। बीजेपी सांसद का सीधा आरोप है कि राहुल गांधी की इन ‘गुप्त’ यात्राओं का मकसद देश में अस्थिरता पैदा करना है।
जॉर्ज सोरोस और ‘गुप्त चीनी समझौते’ का जिक्र
अपने आरोपों को और धार देते हुए निशिकांत दुबे ने मशहूर अमेरिकी अरबपति ‘जॉर्ज सोरोस’ (George Soros) का भी नाम लिया। सोरोस अक्सर भारत सरकार की नीतियों के खिलाफ बयान देने के लिए चर्चा में रहते हैं। दुबे ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी की यात्राओं में जॉर्ज सोरोस के लोग कैसे शामिल थे?
इसके अलावा, उन्होंने 2008 में कांग्रेस पार्टी और चीन (China) की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच हुए उस पुराने समझौते का भी जिक्र किया, जो हमेशा से विवादों में रहा है। दुबे ने पूछा कि आखिर 2008 में चीन के साथ ऐसा कौन सा ‘गुप्त समझौता’ हुआ था, जिसे आज तक जनता के सामने नहीं लाया गया (डिस्क्लोज नहीं किया गया)?
बीजेपी की मांग: SIT का हो गठन और हो पूरी जांच
इन सभी सवालों के जवाब ढूंढने के लिए निशिकांत दुबे ने सरकार से एक बहुत बड़ी मांग कर दी है।
उन्होंने कहा कि सरकार को एक ‘विशेष जांच दल’ (SIT) का गठन करना चाहिए। यह SIT राहुल गांधी की 2004 से 2026 तक की सभी विदेश यात्राओं, उनके विदेशी दोस्तों और उनके द्वारा किए गए सभी गुप्त समझौतों की जांच करे। दुबे ने बेहद तीखे शब्दों में राहुल गांधी को ‘विदेशी ताकतों के हाथ का पुतला’ बता दिया और उन पर देश को तोड़ने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने किस मुद्दे पर सरकार को घेरा था? (छात्र आंदोलन का विवाद)
अब आप सोच रहे होंगे कि अचानक से राहुल गांधी पर यह पलटवार क्यों हुआ?
दरअसल, यह पूरा मामला ‘एक्शन का रिएक्शन’ (Action-Reaction) है। निशिकांत दुबे का यह बयान ठीक उस वक्त आया है जब राहुल गांधी लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह और मोदी सरकार से कड़े सवाल पूछ रहे थे।
हाल ही में (20 जुलाई को) दिल्ली में छात्रों और युवाओं का एक बड़ा आंदोलन हुआ था। राहुल गांधी ने संसद में मुद्दा उठाया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल (Extra Force) का प्रयोग क्यों किया? उन्होंने छात्रों पर पेलेट गन चलाने की परमिशन देने और उनकी बेरहमी से पिटाई के मामले में सीधे गृहमंत्री अमित शाह से जवाब मांगा था। इसी के जवाब में अब बीजेपी ने राहुल गांधी को घेरने की रणनीति अपनाई है।











