Spain Italy dispute: स्पेन ने इटली से आने वाली हवाई और समुद्री यात्राओं पर सीमा नियंत्रण लागू कर दिया है। स्यूटा में प्रवासियों की आमद को लेकर दोनों देशों में तनाव बढ़ा।
यूरोपीय संघ के दो अहम देशों स्पेन और इटली के बीच प्रवासन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इटली की ओर से सीमा नियंत्रण लागू किए जाने के करीब एक सप्ताह बाद अब स्पेन ने भी इटली से आने वाली हवाई और समुद्री यात्राओं पर अस्थायी सीमा जांच शुरू कर दी है।
स्पेन का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच प्रवासियों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। माना जा रहा है कि इस विवाद का असर यूरोप की शेंगेन व्यवस्था और साझा प्रवासन नीति पर भी पड़ सकता है।
क्यों बढ़ा स्पेन और इटली के बीच विवाद?
विवाद की शुरुआत स्यूटा में प्रवासियों की बड़ी संख्या में आमद के बाद हुई। मोरक्को के उत्तरी तट पर स्थित स्यूटा स्पेन का स्वायत्त क्षेत्र है और भौगोलिक रूप से अफ्रीकी महाद्वीप में स्थित है।
यह क्षेत्र लंबे समय से अफ्रीका से यूरोप पहुंचने की कोशिश करने वाले प्रवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश बिंदु रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, मोरक्को से करीब 78 हजार प्रवासियों के स्यूटा पहुंचने के बाद इटली ने स्पेन से आने-जाने वालों पर सीमा नियंत्रण लागू करने का फैसला किया।
इटली की सरकार को आशंका है कि स्यूटा में प्रवेश करने वाले प्रवासियों में से कुछ लोग आगे चलकर इटली पहुंच सकते हैं।
स्पेन ने भी लिया जवाबी फैसला
इटली की कार्रवाई के बाद अब स्पेन ने भी इटली से आने वाली हवाई और समुद्री यात्राओं पर सीमा नियंत्रण लागू कर दिया है। यह प्रतिबंध आधी रात से प्रभावी हुए हैं और करीब एक महीने तक जारी रहने की बात कही गई है।
स्पेन ने इटली से रविवार तक अपनी सीमा निगरानी हटाने की मांग भी की थी। हालांकि, इटली ने साफ किया कि उसकी जांच कम से कम 15 अगस्त तक जारी रहेगी।
इससे दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।
सांचेज़ और मेलोनी आमने-सामने
इस पूरे विवाद ने स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को आमने-सामने ला दिया है।
मेलोनी लंबे समय से यूरोपीय संघ की प्रवासन नीति को और सख्त करने की मांग करती रही हैं। उनकी सरकार अवैध प्रवासन को रोकने और यूरोप की बाहरी सीमाओं को मजबूत करने पर जोर देती रही है।
दूसरी ओर, स्पेन ने इटली की ओर से सीमा नियंत्रण लागू करने के तर्क पर सवाल उठाए हैं।
स्पेन का कहना है कि इटली का फैसला “झूठे तर्कों” पर आधारित है और इसका वास्तविक परिस्थितियों से संबंध नहीं है। स्पेन के मुताबिक, स्यूटा में प्रवेश करने वाले प्रवासियों के पास शेंगेन क्षेत्र के दूसरे हिस्सों में पहुंचने का कोई सीधा रास्ता नहीं था।
क्या है शेंगेन व्यवस्था?
शेंगेन व्यवस्था यूरोप की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में से एक है। इसके तहत सदस्य देशों के बीच लोगों को आम तौर पर बिना नियमित पासपोर्ट जांच के आने-जाने की सुविधा मिलती है।
इसी वजह से किसी एक देश द्वारा दूसरे शेंगेन देश से आने वाले यात्रियों पर सीमा नियंत्रण लागू करना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक कदम माना जाता है।
हालांकि सुरक्षा, प्रवासन या अन्य गंभीर परिस्थितियों में सदस्य देश कुछ समय के लिए अस्थायी सीमा नियंत्रण लागू कर सकते हैं।
प्रवासन बना यूरोप की बड़ी राजनीतिक चुनौती
स्पेन और इटली के बीच मौजूदा विवाद यूरोप में बढ़ती प्रवासन चुनौती को भी सामने लाता है। अफ्रीकी देशों से बड़ी संख्या में लोग समुद्री और अन्य रास्तों से यूरोप पहुंचने की कोशिश करते हैं।
इटली भूमध्यसागर के रास्ते आने वाले प्रवासियों के कारण लंबे समय से दबाव में रहा है, जबकि स्पेन के लिए मोरक्को और उत्तरी अफ्रीका से आने वाले प्रवासी एक बड़ी चुनौती हैं।
अब स्यूटा को लेकर दोनों देशों के बीच पैदा हुआ विवाद इस बात का संकेत है कि प्रवासन नीति यूरोपीय संघ के देशों के बीच राजनीतिक मतभेद का बड़ा कारण बन सकती है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल दोनों देशों ने अपने-अपने सीमा नियंत्रण संबंधी फैसलों को उचित ठहराया है। ऐसे में आने वाले दिनों में स्पेन और इटली के बीच कूटनीतिक बातचीत बेहद महत्वपूर्ण होगी। अगर सीमा जांच लंबी अवधि तक जारी रहती है, तो इससे शेंगेन क्षेत्र में मुक्त आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या स्पेन और इटली प्रवासन संकट पर साझा समाधान निकाल पाएंगे या फिर यह विवाद यूरोप की साझा प्रवासन नीति में एक नई दरार पैदा करेगा।












