Arvind Kejriwal: अमेरिकी सीनेट ने रूस के प्रमुख तेल खरीदार देशों पर कार्रवाई वाले बिल को मंजूरी दी। भारत पर 100% टैरिफ के खतरे के बीच अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार पर हमला बोला।
अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के प्रमुख खरीदार देशों को निशाना बनाने वाले एक विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। इस विधेयक में भारत और चीन जैसे देशों पर भी संभावित कार्रवाई का प्रावधान है। सीनेट में बिल के पक्ष में 86 और विरोध में 11 वोट पड़े।
इस अमेरिकी कदम को लेकर भारत में भी सियासत तेज हो गई है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भारत के रिश्तों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
‘मोदी जी ट्रंप की हर बात मानते हैं’
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमेरिकी सीनेट में बिल पारित होने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला किया।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की विदेश नीति पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रभाव बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि भारत के छोटे-बड़े फैसलों में भी ट्रंप का हस्तक्षेप दिखाई देता है और मोदी सरकार उनकी हर बात मानती है।
केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका की ओर से लगातार भारत के हितों के खिलाफ फैसले लिए जा रहे हैं।
क्या है अमेरिकी सीनेट का नया बिल?
अमेरिकी सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम से विधेयक को 86-11 के भारी बहुमत से मंजूरी दी है।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाना और उन देशों को निशाना बनाना है जो रूस से बड़े पैमाने पर तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीद रहे हैं।
प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के तेल और गैस के प्रमुख खरीदार देशों से आने वाले सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जा सकता है।
भारत के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भी असर?
अमेरिकी सीनेट का यह कदम ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है।
ऐसे में अगर प्रस्तावित कानून लागू होता है और भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाता है, तो दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों पर दबाव बढ़ सकता है।
इससे पहले व्हाइट हाउस के नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के निदेशक केविन हेसेट से भी भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल पूछा गया था। उन्होंने कहा था कि इसका फैसला वार्ताकारों पर निर्भर करेगा।
रूस से तेल खरीदना बना बड़ा मुद्दा
अमेरिका का तर्क है कि रूस से तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की खरीद से रूस को आर्थिक फायदा मिलता है और इससे यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी वित्तीय क्षमता बनी रहती है।
इसी वजह से अमेरिकी सांसद रूस के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपना रहे हैं।
वहीं भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता रहा है कि उसकी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों के आधार पर तेल खरीद के फैसले किए जाते हैं।
केजरीवाल के बयान से बढ़ी राजनीतिक गर्मी
अमेरिकी कार्रवाई ने अब घरेलू राजनीति में भी नया मुद्दा पैदा कर दिया है। केजरीवाल ने इसे मोदी सरकार की विदेश नीति की विफलता से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री पर हमला बोला है।
उनके बयान से साफ है कि आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को भारत की संप्रभुता, विदेश नीति और राष्ट्रीय हित से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है।
आने वाले दिनों में अगर अमेरिकी प्रशासन भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो यह मुद्दा संसद से लेकर चुनावी राजनीति तक बड़ा सवाल बन सकता है।












