Kamal Haasan on Student Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश भर के युवा अपने भविष्य और साफ-सुथरी शिक्षा व्यवस्था के लिए लड़ रहे हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और छात्रों के इस आंदोलन में बीते सोमवार को पुलिस का जो हिंसक रवैया (लाठीचार्ज) देखने को मिला, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।
अब इस छात्र आंदोलन की गूंज दक्षिण भारत तक पहुंच गई है। सिनेमा जगत के दिग्गज अभिनेता और राजनेता कमल हासन (Kamal Haasan) ने इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक और कड़ा संदेश लिखा है। इस संदेश में उन्होंने जहां एक तरफ शिक्षा व्यवस्था और पुलिस की बर्बरता पर तीखे सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से एक मार्मिक अपील भी की है। आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि कमल हासन ने अपने इस संदेश में क्या-क्या कहा है और इसके क्या मायने हैं।
‘हमने तब तक इंतज़ार किया जब तक जानें नहीं गईं’: कमल हासन का दर्द
कमल हासन ने अपने संदेश की शुरुआत एक बहुत ही गहरी और कड़वी सच्चाई से की है। उन्होंने उन छात्रों का जिक्र किया, जिन्होंने सिस्टम की नाकामी और पेपर लीक के तनाव में आकर अपनी जान दे दी।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर लिखा, “हमें तभी सुन लेना चाहिए था जब एक बच्चा रोया था। लेकिन हमने तब तक इंतज़ार किया, जब तक हमारे बहुत से बच्चों की जान नहीं चली गई।”
उनका यह बयान हमारे समाज और सिस्टम पर एक सीधा तमाचा है। वे यह कहना चाहते हैं कि जब पहली बार पेपर लीक या शिक्षा में गड़बड़ी की शिकायत आई थी, तभी हमें जाग जाना चाहिए था, लेकिन हम तब तक खामोश रहे जब तक कई छात्रों ने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम नहीं उठा लिया।
शिक्षा व्यवस्था पर सबसे तीखा प्रहार: ‘योग्यता की जगह अपराध ने ले ली’
कमल हासन ने देश की मौजूदा शिक्षा प्रणाली (Education System) की असलियत को सिर्फ एक लाइन में बयान कर दिया। उन्होंने कहा कि आज हमारा पूरा सिस्टम अंदर से सड़ चुका है।
उन्होंने इसके तीन बड़े कारण बताए:
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पढ़ाई की जगह कोचिंग: आज स्कूलों में ज्ञान नहीं बांटा जा रहा, बल्कि कोचिंग सेंटर्स का करोड़ों का व्यापार चल रहा है।
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जिज्ञासा की जगह चिंता: बच्चों के अंदर कुछ नया सीखने की जिज्ञासा (Curiosity) खत्म हो गई है और उसकी जगह डिप्रेशन और चिंता (Anxiety) ने ले ली है।
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योग्यता की जगह अपराध: जब पेपर लीक होते हैं, तो टैलेंट (योग्यता) की कोई कद्र नहीं रह जाती। पैसे के दम पर जो अपराध होता है, वही हावी हो जाता है।
पुलिस के लाठीचार्ज पर गुस्सा: ‘यह देश की विफलता है’
सोमवार को जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। इस घटना पर कमल हासन ने गहरी नाराजगी जताई।
उन्होंने सरकार को आईना दिखाते हुए लिखा, “जब किसी देश के बच्चों को उनके सवालों के जवाब देने के बजाय रास्ते में बैरिकेड और लाठियां मिलें, तो यह उस देश की सबसे बड़ी विफलता (हार) है।” उनका मानना है कि युवाओं के वाजिब सवालों का जवाब लाठी-डंडों से देना एक स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी नहीं है।
सोनम वांगचुक से भावुक अपील: ‘कृपया अपना अनशन खत्म कर दीजिए’
जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे मशहूर शिक्षाविद् सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की सेहत लगातार बिगड़ रही है। उनके गिरते वजन और मेडिकल रिपोर्ट को देखकर कमल हासन ने उनसे एक बहुत ही भावुक अपील की है।
उन्होंने लिखा, “सोनम वांगचुक, आने वाले समय में इस देश को आपकी नैतिक आवाज़ और आपके सही मार्गदर्शन की बहुत ज़रूरत होगी। कृपया अपना अनशन समाप्त कर दीजिए।” कमल हासन यह समझते हैं कि देश को वांगचुक जैसे सच्चे और ईमानदार लोगों की जिंदा जरूरत है, इसलिए उन्होंने वांगचुक से अपनी जान खतरे में न डालने की गुजारिश की है।
छात्रों के नाम संदेश: ‘अब देश की बारी है कि वह अपना कर्तव्य निभाए’
अपने पोस्ट के अंत में, कमल हासन ने जंतर-मंतर पर लाठियां खा रहे और अपने हक की लड़ाई लड़ रहे युवाओं की हिम्मत बढ़ाई।
उन्होंने छात्रों का हौसला बढ़ाते हुए लिखा, “भारत के बच्चों से बस इतना कहना है कि आप हम सबमें सबसे बेहतर हैं। आपने अपना कर्तव्य पूरी ईमानदारी से निभाया है। अब इस देश की बारी है कि वह आपके प्रति अपना कर्तव्य निभाए। उन्होंने एक बहुत ही खूबसूरत दुआ देते हुए अपनी बात खत्म की— “ईश्वर करे, आपके सपने हमेशा हमारी विफलताओं से बड़े रहें।”
जब कमल हासन जैसी बड़ी शख्सियत इस तरह खुलकर छात्रों के समर्थन में आती है, तो यह आंदोलन सिर्फ कुछ युवाओं का नहीं, बल्कि पूरे देश की आवाज बन जाता है। कमल हासन के ये शब्द बता रहे हैं कि आज का युवा जो दर्द सह रहा है, उसे महसूस करने वाले लोग अभी भी देश में मौजूद हैं। अब देखना यह है कि क्या कमल हासन की इस अपील के बाद सोनम वांगचुक अपना अनशन खत्म करते हैं और क्या सरकार छात्रों की मांगों पर कोई ठोस कदम उठाती है।













