Sonam Wangchuk Hunger Strike: आज के समय में देश के युवाओं और छात्रों के लिए सबसे बड़ी परेशानी ‘पेपर लीक’ बन चुकी है। आप दिन-रात एक करके किसी परीक्षा की तैयारी करते हैं और अचानक खबर आती है कि सिस्टम की नाकामी की वजह से पेपर लीक हो गया है। इसी धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है।
इस छात्र आंदोलन को तब और ज्यादा ताकत मिल गई जब देश के मशहूर शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) छात्रों को न्याय दिलाने के लिए भूख हड़ताल पर बैठ गए। आज उनके अनशन को पूरे 25 दिन हो चुके हैं, लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इस लंबी चुप्पी से नाराज होकर अब सीजेपी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री को लेकर कई गंभीर और सीधे सवाल उठाए हैं। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि अभिजीत दीपके ने क्या कहा है और इस आंदोलन की मौजूदा स्थिति क्या है।
क्या है पूरा मामला और क्यों हो रहा है प्रदर्शन?
पिछले कुछ समय से देश में प्रतियोगी परीक्षाओं (खासकर नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं) में हुई धांधली ने पूरे एग्जाम सिस्टम पर सवालिया निशान लगा दिया है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और अन्य छात्र संगठन इसी सिस्टम में सुधार की मांग कर रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी (Transparent) नहीं हो जाती और पेपर लीक के जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका यह आंदोलन खत्म नहीं होगा। इसी मांग का समर्थन करते हुए सोनम वांगचुक पिछले 25 दिनों से बिना कुछ खाए जंतर-मंतर पर अपना अनशन जारी रखे हुए हैं।
‘चुनाव जीतना ही राजनीति नहीं’: पीएम मोदी पर सीजेपी का सीधा सवाल
सोनम वांगचुक की लगातार गिरती सेहत और सरकार की खामोशी ने अब प्रदर्शनकारियों का गुस्सा बढ़ा दिया है। सीजेपी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए एक बहुत ही कड़क पोस्ट लिखा है।
अभिजीत ने अपने पोस्ट में कहा कि एक तरफ 25 दिनों से देश का एक सम्मानित नागरिक अनशन पर बैठा है, लेकिन प्रधानमंत्री की तरफ से इस पर अब तक कोई प्रतिक्रिया (Reaction) नहीं आई है।
उन्होंने राजनीति के असल मायने समझाते हुए लिखा, “राजनीति का मतलब सिर्फ चुनावी रैलियां करना और हर हाल में चुनाव जीतना नहीं होता है। राजनीति का असली मतलब जनता के प्रति जवाबदेह (Accountable) होना है।” उन्होंने पीएम से सीधा सवाल पूछा है कि देश को यह बताया जाना चाहिए कि सरकार ने अब तक सोनम वांगचुक से बातचीत क्यों नहीं की, ताकि इस गतिरोध का कोई समाधान (Solution) निकल सके।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई से नाराजगी
अपनी पोस्ट में अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस के रवैये पर भी गहरी नाराजगी जाहिर की है। हम सभी जानते हैं कि पिछले एक महीने से ज्यादा समय से छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे हैं।
अभिजीत ने सवाल उठाया कि देश जानना चाहता है कि अपने भविष्य के लिए आवाज उठा रहे इन छात्रों पर पुलिस ने इतनी सख्त और कठोर कार्रवाई क्यों की? कई मौकों पर पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की और लाठीचार्ज जैसी खबरें भी सामने आई हैं। सीजेपी का आरोप है कि पुलिस का व्यवहार छात्रों के प्रति बेहद संवेदनहीन और कठोर रहा है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
इस पूरे विवाद के केंद्र में शिक्षा मंत्रालय है। छात्र लगातार मांग कर रहे हैं कि देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दें।
सीजेपी चीफ अभिजीत दीपके ने भी इसी मांग को दोहराते हुए सरकार से पूछा है कि इतनी बड़ी धांधली और सिस्टम की नाकामी के कारण कई छात्रों ने डिप्रेशन में आकर अपनी जान दे दी। इतने सारे छात्रों की दुखद मौत के बाद भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सरकार के लिए इतने जरूरी (VIP) क्यों बने हुए हैं? उन पर कोई सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?












