Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म से कम नहीं लग रही है। जब से साउथ के सुपरस्टार थलापति विजय (Thalapathy Vijay) ने अपनी नई पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) के साथ सत्ता संभाली है, तब से ही वहां का सियासी पारा गरम है। चूंकि विजय की सरकार एक गठबंधन की सरकार है, इसलिए अब इसे गिराने की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है।
खबर है कि टीवीके (TVK) के एक विधायक को करोड़ों रुपये का लालच देकर पाला बदलने की कोशिश की गई है। इस मामले में पुलिस ने सख्त एक्शन लेते हुए एफआईआर (FIR) भी दर्ज कर ली है। आइए, एक आम नागरिक की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर यह 35 करोड़ का पूरा खेल क्या है, इसमें किन बड़े नेताओं का नाम आ रहा है और राज्य का मौजूदा राजनीतिक समीकरण क्या कहता है।
क्या है 35 करोड़ रुपये का पूरा मामला?
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब टीवीके पार्टी के विधायक एन. इलैयाराजा ने पुलिस में एक बेहद गंभीर शिकायत दर्ज कराई। इलैयाराजा ने आरोप लगाया कि उन पर अपनी पार्टी छोड़ने और सत्ताधारी गठबंधन से अलग होने का भारी दबाव बनाया जा रहा है।
विधायक के मुताबिक, उन्हें अपनी वफादारी बदलने के लिए पूरे 35 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया था। सिर्फ पैसा ही नहीं, बल्कि बात न मानने पर उन्हें धमकियां भी दी गईं। इस मामले में जिस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है, वह कोई आम इंसान नहीं है। यह शख्स पूर्व डीएमके मंत्री वी. सेंथिल बालाजी का भाई अशोक कुमार है।
कैसे रची गई सरकार गिराने की साजिश? (आरोपी का कबूलनामा)
पुलिस ने जब इस मामले की जांच शुरू की, तो कई चौंकाने वाले राज सामने आए। जांच अधिकारियों के मुताबिक, इस ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ (विधायकों की खरीद-फरोख्त) के खेल में बिचौलियों का इस्तेमाल किया गया था।
पुलिस ने इस मामले में ‘नरेश’ नाम के एक आरोपी को पकड़ा है। नरेश ने पूछताछ में जो कबूला, उसने इस केस को और भी हाई-प्रोफाइल बना दिया है। आरोपी नरेश ने पुलिस को बताया कि विधायक इलैयाराजा को 35 करोड़ का ऑफर देने से पहले, उसने चेन्नई में अशोक कुमार से आमने-सामने मुलाकात की थी। नरेश का दावा है कि उसने अशोक कुमार और पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी के सीधे निर्देशों पर ही टीवीके विधायक से संपर्क किया था।
पुलिस का एक्शन: 5 गिरफ्तार और 4 धाराओं में FIR
विधायक इलैयाराजा की शिकायत और शुरुआती सबूतों को देखते हुए तमिलनाडु पुलिस तुरंत हरकत में आ गई है।
5 लोगों की गिरफ्तारी: चेन्नई पुलिस ने हाल ही में टीवीके विधायक को लालच देने और सरकार गिराने की साजिश रचने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
अशोक कुमार पर एफआईआर: पुलिस ने दर्ज बयानों के आधार पर मुख्य आरोपी अशोक कुमार के खिलाफ कुल 4 धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इसमें सबसे अहम ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ (Prevention of Corruption Act) की धाराएं भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि जांच कई स्तरों पर चल रही है और आगे की कार्रवाई अब तक जुटाए गए सबूतों के आधार पर ही होगी।
डीएमके (DMK) और एमके स्टालिन के क्या हैं दावे?
यह पूरा सियासी ड्रामा ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य में पहले से ही राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल है। मुख्य विपक्षी दल डीएमके (DMK) लगातार यह दावा कर रहा है कि थलापति विजय की सरकार ज्यादा दिन नहीं टिकेगी।
डीएमके अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी विजय सरकार की स्थिरता पर खुलेआम सवाल उठाए हैं। स्टालिन का तर्क है कि टीवीके के पास खुद का पूर्ण बहुमत नहीं है, इसलिए यह सरकार अपना 5 साल का कार्यकाल कभी पूरा नहीं कर पाएगी। उन्होंने तो यहां तक कह दिया है कि राज्य की जनता को कभी भी ‘मध्यावधि चुनाव’ (Mid-term polls) का सामना करना पड़ सकता है।
विजय की टीवीके सरकार का मौजूदा गणित
अगर हम हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो किसी भी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत (Clear majority) नहीं मिला था। सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) के नेतृत्व वाली टीवीके पार्टी को चुनाव में 108 सीटें हासिल हुई थीं। बहुमत का आंकड़ा पार करने के लिए विजय ने कांग्रेस और कुछ अन्य छोटे दलों का समर्थन लिया और अपनी गठबंधन सरकार बनाई। यही वजह है कि विपक्षी दल इस गठबंधन को कमजोर मानकर विधायकों को तोड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं।
तमिलनाडु की राजनीति में “पैसे के दम पर विधायक तोड़ने” का यह आरोप बहुत गंभीर है। थलापति विजय के लिए मुख्यमंत्री के तौर पर यह पहली बड़ी अग्निपरीक्षा है। उन्हें न सिर्फ अपनी सरकार बचानी है, बल्कि अपने विधायकों को भी एकजुट रखना है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि पुलिस जांच में सेंथिल बालाजी के भाई के खिलाफ क्या पुख्ता सबूत मिलते हैं और क्या एमके स्टालिन का मध्यावधि चुनाव वाला दावा सच साबित होता है या विजय का किला मजबूत रहता है।













