Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या का भव्य राम मंदिर देश के करोड़ों हिंदुओं की आस्था और दशकों के संघर्ष का प्रतीक है। जब एक आम आदमी अपनी खून-पसीने की कमाई से रामलला के दरबार में चढ़ावा देता है, तो उसके पीछे गहरा विश्वास होता है। लेकिन, पिछले कुछ दिनों से राम मंदिर के दान और चढ़ावे में चोरी या कथित गड़बड़ी की जो खबरें आ रही हैं, उसने हर रामभक्त को निराश किया है।
इस पूरे विवाद पर अब विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार का एक बहुत ही अहम बयान सामने आया है। उन्होंने इस घटना को ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ तो बताया है, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि मंदिर के चढ़ावे में जो भी चोरी या हेराफेरी हुई है, उसके लिए वीएचपी (VHP) बिल्कुल भी जिम्मेदार नहीं है। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि वीएचपी ने ऐसा क्यों कहा, चंपत राय पर कोई सीधा एक्शन क्यों नहीं हो रहा है, और इस पूरे मामले में आलोक कुमार की 4 बड़ी मांगें क्या हैं।
वीएचपी (VHP) ने क्यों कहा- ‘हम इसके लिए जिम्मेदार नहीं’?
राम मंदिर आंदोलन में विश्व हिंदू परिषद की भूमिका सबसे बड़ी रही है। ऐसे में जब मंदिर के अंदर से गड़बड़ी की बात सामने आई, तो लोगों की नजरें वीएचपी की तरफ भी उठीं।
एक इंटरव्यू में इस बात का जवाब देते हुए आलोक कुमार ने स्थिति बिल्कुल साफ कर दी। उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आ गया था, तभी यह तय हो गया था कि विश्व हिंदू परिषद का काम अब पूरा हो चुका है। राम मंदिर को बनाने और उसे चलाने (मैनेजमेंट) की जिम्मेदारी वीएचपी की नहीं है, बल्कि सरकार द्वारा बनाए गए ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ की है। इसलिए, वहां जो भी हो रहा है, उसका जिम्मा वीएचपी पर नहीं डाला जा सकता।
चंपत राय पर एक्शन क्यों नहीं? (ड्राइवर और लापरवाही का पेच)
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की हो रही है। जब एसआईटी (SIT) की शुरुआती जांच हुई, तो चंपत राय ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन वह अभी भी वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।
जब आलोक कुमार से पूछा गया कि क्या वीएचपी चंपत राय को उनके पद से हटाएगी? तो उन्होंने बड़ा ही सधा हुआ जवाब दिया।
उन्होंने बताया:
आरोप ड्राइवर पर है: आलोक कुमार ने कहा कि किसी ने भी सीधे तौर पर चंपत राय पर चोरी का आरोप नहीं लगाया है। ये आरोप असल में उनके ड्राइवर पर लगे हैं।
लापरवाही हो सकती है: उन्होंने यह जरूर माना कि चंपत राय ‘लापरवाही’ के दोषी हो सकते हैं, क्योंकि उनके अधीन काम करने वालों ने गड़बड़ी की।
जांच का इंतजार: आलोक कुमार ने स्पष्ट किया कि जब तक एसआईटी (SIT) की फाइनल रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक चंपत राय को बर्खास्त करना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही उन पर कोई एक्शन लेने पर विचार किया जाएगा।
जनता का भरोसा जीतने के लिए VHP अध्यक्ष की 4 बड़ी मांगें
चढ़ावा चोरी होने से रामभक्तों के मन में जो शक पैदा हुआ है, उसे दूर करने के लिए आलोक कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर राम मंदिर की एक तस्वीर शेयर करते हुए चार सख्त मांगें रखी हैं:
तुरंत एफआईआर (FIR): इस गड़बड़ी में जो भी लोग शामिल हैं, उनके खिलाफ बिना किसी देरी के कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए एफआईआर दर्ज हो।
जांच में तेजी: मंदिर से जुड़े इस मामले की जो भी जांच चल रही है, उसे बहुत तेजी से पूरा किया जाए ताकि सच जल्द बाहर आए।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट: इस मामले को आम अदालतों में लटकाने के बजाय, ‘फास्ट-ट्रैक कोर्ट’ में चलाया जाए। मामले की हर दिन (रोजाना) सुनवाई हो ताकि समय पर न्याय मिल सके।
कड़ी सजा: जो लोग भी भगवान के खजाने में सेंध लगाने के दोषी पाए जाएं, उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए।
यूपी सरकार की SIT जांच कहां तक पहुंची?
आपको बता दें कि इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन अधिकारियों वाली एक ‘स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम’ (SIT) बनाई है।
यह एसआईटी चढ़ावे के पैसों का हिसाब-किताब, जमीन के लेन-देन, गायब हुए कीमती सामान और मैनेजमेंट की कमियों की बहुत बारीकी से जांच कर रही है। एसआईटी ने अपनी पहली (प्रारंभिक) रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है, जिसके बाद ही ये सारे एक्शन हो रहे हैं। हालांकि, दूसरी तरफ मंदिर ट्रस्ट ने अपने ऊपर लगे किसी भी बड़े घोटाले या गड़बड़ी के आरोपों से इनकार किया है।













