Lucknow-Kanpur Expressway: अगर आप लखनऊ या कानपुर में रहते हैं या अक्सर इन दोनों शहरों के बीच सफर करते हैं, तो आप वहां के भयंकर ट्रैफिक और जाम के दर्द को बहुत अच्छे से समझते होंगे। जो सफर एक घंटे में पूरा होना चाहिए, उसमें अक्सर दो से ढाई घंटे लग जाते हैं। लेकिन अब आपके लिए एक बहुत बड़ी और राहत देने वाली खबर है।
उत्तर प्रदेश को सड़क नेटवर्क के मामले में एक साथ ‘डबल सौगात’ मिलने जा रही है। एक तरफ जहां बहुप्रतीक्षित ‘लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे’ आम जनता के लिए खुलने वाला है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने कानपुर को बुंदेलखंड से जोड़ने वाले एक नए ‘कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे’ को भी हरी झंडी दे दी है। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि ये दोनों प्रोजेक्ट क्या हैं, इन पर कितना टोल लगेगा और इससे आपके सफर व समय में कितनी बचत होने वाली है।
13 जुलाई से मिलेगी लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की सौगात
तैयारी कर लीजिए, क्योंकि 13 जुलाई 2026 से लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। करीब 4,700 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बने इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे।
इस खास मौके पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहेंगे। यह कार्यक्रम लखनऊ के कानपुर रोड इलाके में होगा। अच्छी खबर यह भी है कि इसी दिन लखनऊ के इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर बनने वाले एक नए फ्लाईओवर की नींव भी रखी जाएगी, जिससे शहर के अंदर का ट्रैफिक भी सुधरेगा।
एक्सप्रेसवे की खासियत: 45 मिनट में कैसे पूरा होगा सफर?
यह एक्सप्रेसवे कोई आम सड़क नहीं है। इसकी कुल लंबाई 63 किलोमीटर है। फिलहाल इसे 6 लेन का बनाया गया है, लेकिन भविष्य में जरूरत पड़ने पर इसे 8 लेन तक चौड़ा किया जा सकता है।
इस 63 किमी के रास्ते में 18 किलोमीटर का हिस्सा खंभों पर (एलिवेटेड) बना है, जबकि 45 किलोमीटर का हिस्सा बिल्कुल नया (ग्रीनफील्ड कॉरिडोर) है।
क्या होगा फायदा?
अभी पुराने नेशनल हाईवे से लखनऊ से कानपुर जाने में कम से कम 1.5 से 2.5 घंटे का समय लगता है। इस नए एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद आप यह दूरी मात्र 45 से 60 मिनट में तय कर लेंगे। इससे पुराने हाईवे का लगभग 70 प्रतिशत ट्रैफिक कम हो जाएगा और सफर पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा।
टोल टैक्स और सुरक्षा: जेब पर कितना पड़ेगा असर?
अब सबसे जरूरी बात— इस फर्राटेदार सड़क पर चलने के लिए आपको अपनी जेब कितनी ढीली करनी पड़ेगी?
इस एक्सप्रेसवे पर कुल 4 टोल प्लाजा बनाए गए हैं:
सामान्य कार वालों के लिए: अगर आप कार से जा रहे हैं, तो एक तरफ (वन-वे) का टोल 275 रुपये लगेगा। अगर आप 24 घंटे के अंदर वापस लौट आते हैं, तो आपको 415 रुपये चुकाने होंगे।
फास्टैग (Fastag) योजना: जिन लोगों ने वार्षिक फास्टैग योजना ले रखी है, उन्हें केवल 15 रुपये का नाममात्र टोल देना होगा।
सुरक्षा के लिए पूरे रास्ते पर आधुनिक ANPR और PTZ कैमरे लगाए गए हैं, जो तेज रफ्तार और ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वालों पर 24 घंटे नजर रखेंगे।
कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे: बुंदेलखंड के लिए नया रास्ता
राजधानी लखनऊ की खुशखबरी के साथ ही कानपुर और बुंदेलखंड के लोगों के लिए भी एक बड़ा ऐलान हुआ है। केंद्र सरकार ने 123 किलोमीटर लंबे ‘कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे’ को मंजूरी दे दी है।
लगभग 7,145 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह नया हाईवे कानपुर के रमईपुर (मगरासा) से शुरू होकर महोबा जिले के कबरई तक जाएगा। भविष्य में यह रास्ता बांदा-सागर हाईवे और भोपाल-मुंबई कॉरिडोर से भी जुड़ जाएगा, जिससे महाराष्ट्र या मध्य प्रदेश जाना भी आसान हो जाएगा।
‘खूनी हाईवे’ से मिलेगी निजात, बचेंगी हजारों जानें
आखिर इस नए हाईवे की जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल, कानपुर से महोबा जाने वाला मौजूदा नेशनल हाईवे-34 (NH-34) सड़क हादसों के लिए काफी बदनाम रहा है।
आंकड़े बताते हैं कि पिछले 5 सालों में इस पुराने रास्ते पर करीब 994 भयानक एक्सीडेंट हुए, जिनमें 604 लोगों की जान चली गई और 890 लोग घायल हुए। नया ग्रीनफील्ड हाईवे ‘एक्सेस कंट्रोल्ड’ होगा, यानी इसमें हर कहीं से गाड़ियां या जानवर नहीं घुस पाएंगे। स्थानीय लोगों के लिए अलग से 12 किमी लंबी सर्विस रोड बनाई जाएगी। इसके अलावा रास्ते में 16 बड़े पुल और एक रेलवे ओवरब्रिज भी बनेगा, जिससे हादसे ना के बराबर होंगे।
3 घंटे का सफर अब सिर्फ डेढ़ घंटे में (व्यापार को फायदा)
अभी कानपुर से कबरई तक का सफर तय करने में लोगों को साढ़े तीन घंटे तक लग जाते हैं। लेकिन जब यह नया हाईवे बनकर तैयार हो जाएगा, तो यही सफर सिर्फ डेढ़ से दो घंटे में पूरा हो जाएगा।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने लक्ष्य रखा है कि अगले 3 महीनों में किसानों से जमीन लेने (भूमि अधिग्रहण) और टेंडर का काम पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद सड़क बनने का काम शुरू होगा। इस सड़क के बनने से किसानों को अपनी फसल मंडी ले जाने में आसानी होगी और ट्रांसपोर्ट का खर्चा भी बचेगा।













