Sambhal Land Fraud: एक आम आदमी अपनी पूरी जिंदगी पाई-पाई जोड़कर एक छोटा सा घर या प्लॉट खरीदने का सपना देखता है। लेकिन जरा सोचिए, जिन अधिकारियों के कंधों पर सरकारी और आम जनता की जमीन की हिफाजत करने की जिम्मेदारी हो, वही अगर फर्जीवाड़ा करने लगें तो क्या होगा? उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है।
संभल पुलिस ने सरकारी जमीन के फर्जीवाड़े में एक बहुत बड़ी कार्रवाई की है। यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं है, बल्कि 6 साल पुराने एक ऐसे जमीन घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें तत्कालीन एसडीएम (SDM) से लेकर तहसीलदार और ग्राम पंचायत सदस्यों तक के नाम शामिल हैं। पुलिस ने इस मामले में पूर्व एसडीएम ओमबीर सिंह और पूर्व तहसीलदार कर्म सिंह समेत 6 लोगों को गिरफ्तार कर सीधा जेल भेज दिया है। आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि यह पूरा खेल कैसे खेला गया और अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद संभल जिले की गुन्नौर तहसील के भोना नगला गांव से जुड़ा है। यहां के एक गैर-आबादी वाले इलाके ‘सुखोला’ में सरकारी जमीन मौजूद थी। नियमों के अनुसार, इस प्रतिबंधित सरकारी भूमि को किसी भी आम व्यक्ति को आवंटित (Allot) नहीं किया जा सकता था।
लेकिन, करीब 6 साल पहले अधिकारियों ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए इस जमीन को 58 ऐसे लोगों के नाम कर दिया, जो इसके बिल्कुल भी हकदार नहीं थे (अपात्र थे)। जब इस पुराने गड़े मुर्दे की फाइलें खुलीं, तो पता चला कि यह एक बहुत बड़े नेटवर्क की मिलीभगत का नतीजा था।
कैसे रचा गया फर्जीवाड़े का खेल?
आप सोच रहे होंगे कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जमीन को आखिर लोगों के नाम कैसे कर दिया गया? जांच में जो तरीका सामने आया है, वह बहुत ही चौंकाने वाला है।
दरअसल, सुखोला इलाके की वह सरकारी जमीन राजस्व रिकॉर्ड में ‘झाऊ श्रेणी’ (ऐसी जमीन जहां झाड़ियां या जंगल होते हैं) में दर्ज थी। भ्रष्ट अधिकारियों ने कागजों में हेराफेरी करके फर्जी तरीके से इस जमीन को ‘रेत श्रेणी’ की भूमि में बदल दिया। एक बार जमीन की श्रेणी (Category) बदलने के बाद, इसे आसानी से 58 फर्जी लोगों के नाम आवंटित कर दिया गया। मजेदार बात यह है कि जब एक बार इस आवंटन को रद्द (Cancel) कर दिया गया था, उसके बावजूद तत्कालीन एसडीएम और तहसीलदार ने राजस्व विभाग, चकबंदी अधिकारी और ग्राम प्रधानों के साथ मिलकर इस जमीन को दोबारा उन लोगों के नाम दर्ज करवा दिया।
कैसे खुला राज और पुलिस ने क्या लिया एक्शन?
पाप चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, एक दिन सामने आ ही जाता है। इस सरकारी जमीन के आवंटन में गड़बड़ी की भनक जब प्रशासन को लगी, तो एक जांच कमेटी बनाई गई। कमेटी ने गहराई से फाइलों को खंगाला और 4 जून 2026 को अपनी विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी (DM) को सौंप दी।
रिपोर्ट में अधिकारियों और कर्मचारियों की साफ तौर पर मिलीभगत पकड़ी गई। इसके बाद, इलाके की वर्तमान लेखपाल स्वाती शर्मा ने गुन्नौर थाने में इन सभी के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करवाई।
एफआईआर दर्ज होते ही संभल पुलिस तुरंत एक्शन मोड में आ गई। पुलिस ने इस महा-घोटाले में कुल 19 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, 3 लेखपाल, 2 कानूनगो, एक चकबंदी अधिकारी और 6 ग्राम पंचायत सदस्य शामिल हैं। पुलिस ने फुर्ती दिखाते हुए पूर्व एसडीएम ओमबीर सिंह, पूर्व तहसीलदार कर्म सिंह, एक सरकारी वकील और लेखपाल समेत 6 लोगों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है। बाकी बचे आरोपियों की तलाश और आगे की कानूनी कार्रवाई तेजी से चल रही है।
संभल का यह मामला इस बात का साफ सबूत है कि अगर जांच एजेंसियां और प्रशासन ठान ले, तो कोई भी रसूखदार अधिकारी कानून के शिकंजे से बच नहीं सकता। आज के डिजिटल युग में जमीन के रिकॉर्ड्स में हेराफेरी करना अब उतना आसान नहीं रहा है। इस सख्त कार्रवाई ने प्रदेश के बाकी भ्रष्ट अधिकारियों को भी एक कड़ा संदेश दिया है कि सरकारी संपत्ति के साथ किया गया कोई भी ‘खेल’ कभी भी भारी पड़ सकता है।











