प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों (इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) की आधिकारिक यात्रा के पहले चरण में दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया पहुंचे हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया के पौराणिक शहर योग्यकर्ता (Yogyakarta) का दौरा करेंगे, जहां वे 9वीं सदी के ऐतिहासिक प्रम्बनन (Prambanan) मंदिर में दर्शन करेंगे। यह मंदिर दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत और इंडोनेशिया के बीच 1100 साल से भी अधिक पुराने गहरे सांस्कृतिक और हिंदू पौराणिक रिश्तों का जीवंत प्रतीक है।
1100 साल से भी अधिक पुराना है प्रम्बनन मंदिर का इतिहास
प्रम्बनन मंदिर का निर्माण 9वीं सदी के मध्य में लगभग 850 ईस्वी के दौरान संजय राजवंश के राजा राकाई पिकातन के शासनकाल में हुआ था। यह इंडोनेशिया का सबसे बड़ा और दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे विशाल हिंदू मंदिरों में से एक है। मूल रूप से इस मंदिर परिसर में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 240 मंदिर थे। इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश की त्रिमूर्ति सबसे प्रमुख है, जिसमें लगभग 47 मीटर ऊंचा केंद्रीय मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस शिव मंदिर में महादेव के अलावा मां पार्वती, भगवान गणेश और महर्षि अगस्त्य की प्राचीन मूर्तियां स्थापित हैं।
इस मंदिर की दीवारों पर पत्थरों को बेहद खूबसूरती से तराश कर रामायण और भागवत पुराण की कथाओं को उकेरा गया है। मंदिर परिसर के ओपन-एयर थिएटर में प्रसिद्ध ‘प्रम्बनन रामायण बैले’ नाटक का मंचन होता है, जिसे देखने देश-विदेश से लोग आते हैं। वर्ष 1991 में यूनेस्को (UNESCO) ने इस मंदिर को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।
एएसआई के साथ मिलकर क्षतिग्रस्त मंदिरों के जीर्णोद्धार का होगा ऐलान
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर बड़ा कदम उठाएंगे। पीएम मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो इस मंदिर परिसर में कुछ छोटे और क्षतिग्रस्त मंदिरों के संरक्षण और जीर्णोद्धार का साझा ऐलान करेंगे। इस काम को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और इंडोनेशियाई पुरातत्व विभाग मिलकर अंजाम देंगे।
इसके अलावा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा होगी। भारत और इंडोनेशिया के बीच ‘ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल’ की खरीद को लेकर भी एक बड़ा रक्षा समझौता होने की उम्मीद है। इंडोनेशिया का साबांग बंदरगाह भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से महज 160 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो मलक्का जलडमरूमध्य के बेहद करीब है। यह साबांग बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के पास स्थित है, जहां से दुनिया का 25 प्रतिशत और चीन का 80 प्रतिशत तेल व अन्य सामान गुजरता है।
इंडोनेशिया में सदियों पुराने हिंदू साम्राज्य और जीवंत संस्कृति
इंडोनेशिया में पहली सदी से लेकर 15वीं शताब्दी तक कुताई, तारामुनगर, श्रीविजय, मताराम, कंदिरी, सिंघासारी और मजापाहित जैसे शक्तिशाली हिंदू-बौद्ध साम्राज्यों का शासन रहा है। इनके अवशेष आज भी जावा, सुमात्रा, बोर्नियो और बाली जैसे द्वीपों पर प्राचीन मंदिरों के रूप में मिलते हैं, जिन्हें वहां ‘चंडी’ कहा जाता है। जावा में रामायण का अपना प्राचीन संस्करण है जिसे ‘ककविन’ कहा जाता है। वहां हनुमान जी को ‘अनोमान’ कहा जाता है और वे राष्ट्रीय नायक की तरह पूजे जाते हैं। यहां तक कि देश की सरकारी एयरलाइंस का नाम ‘गरुड़’ है, सैन्य खुफिया शाखा का प्रतीक हनुमान जी हैं, और वहां के सबसे बड़े बैंक व नोटों पर भगवान गणेश की आकृति छपी हुई है।
इंडोनेशिया के बाली द्वीप को देवताओं की भूमि कहा जाता है, जहां बेसकिह (Besakih) नाम का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है। माउंट अगंग ज्वालामुखी की ढलानों पर स्थित इस परिसर में 80 से अधिक मंदिर हैं, जिसकी नींव 8वीं शताब्दी में ऋषि मार्कंडेय ने रखी थी। साल 1963 में जब माउंट अगंग में ज्वालामुखी विस्फोट हुआ था, तब आग उगलते लावे से भी इस मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचा था, जिसे स्थानीय लोग दैवीय चमत्कार मानते हैं।
इसके अलावा जावा के दियांग पठार पर महाभारत के पात्रों—अर्जुन, भीम, घटोत्कच और द्रौपदी—के नाम पर चंडी अर्जुन, चंडी भीम जैसे 8 मंदिर स्थित हैं, जो प्रम्बनन से भी प्राचीन माने जाते हैं। लावु पर्वत की ढलानों पर मजापाहित साम्राज्य के 15वीं शताब्दी के मंदिर हैं, जिनमें चंडी सुकुह मंदिर माया पिरामिड जैसा दिखता है। चंडी कंदल मंदिर में राजा अनुसापति का स्मारक है और यह गरुड़ पुराण से जुड़ा है। चंडी सिंघासारी में भगवान शिव के भैरव रूप का विशाल मंदिर है जहां मां सरस्वती और प्रजापारमिता की प्राचीन मूर्तियां मौजूद हैं।
इंडोनेशिया की कुल 27 करोड़ की आबादी में लगभग 87 फीसदी (24.2 करोड़ से अधिक) मुस्लिम आबादी है, जबकि हिंदू आबादी लगभग 1.7 फीसदी (करीब 45 लाख) है। इंडोनेशिया के बाली द्वीप पर हिंदू बहुसंख्यक हैं, जहां लगभग 85 प्रतिशत आबादी हिंदू है। जकारों, मेदान, बाली और सुराबाया जैसे इलाकों में करीब सवा लाख प्रवासी भारतीय (तमिल, सिंधी, गुजराती और पंजाबी सिख) बसे हुए हैं।
FAQ:
Q1: प्रम्बनन मंदिर का निर्माण किसने करवाया था और इसमें किस देवता की मुख्य मूर्ति है?
A1: प्रम्बनन मंदिर का निर्माण 9वीं सदी के मध्य (लगभग 850 ईस्वी) में संजय राजवंश के राजा राकाई पिकातन के काल में हुआ था। इस मंदिर परिसर में ब्रह्मा, विष्णु और महेश की त्रिमूर्ति सबसे प्रमुख है, जिसमें 47 मीटर ऊंचा मुख्य मंदिर भगवान शिव का है।
Q2: पीएम मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान इस ऐतिहासिक मंदिर को लेकर क्या बड़ा ऐलान होने की उम्मीद है?
A2: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो प्रम्बनन मंदिर परिसर में कुछ छोटे और क्षतिग्रस्त मंदिरों के संरक्षण और जीर्णोद्धार का साझा ऐलान करेंगे। इस काम को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और इंडोनेशियाई टीम मिलकर पूरा करेगी।
Q3: इंडोनेशिया की राष्ट्रीय पहचान और संस्कृति में हिंदू प्रतीकों के कौन से प्रमुख उदाहरण मिलते हैं?
A3: इंडोनेशिया में सरकारी एयरलाइंस का नाम ‘गरुड़’ है, सैन्य खुफिया शाखा का प्रतीक चिन्ह ‘हनुमान’ (अनोमान) है, और वहां के सबसे बड़े बैंक व नोटों पर भगवान गणेश की आकृति अंकित है। इसके अतिरिक्त, वहां रामायण का प्राचीन संस्करण ‘ककविन’ लोकप्रिय है।












