Baruipur Encounter: जब भी देश में किसी मासूम बच्ची के साथ कोई दरिंदगी होती है, तो हर आम नागरिक का खून खौल उठता है। पिछले कुछ दिनों से पश्चिम बंगाल का बरुईपुर (Baruipur) इलाका भी ऐसे ही एक बेहद दुखद और खौफनाक मामले की वजह से चर्चा में था। यहां एक 12 साल की बच्ची के साथ रेप और हत्या का मामला सामने आया था।
लेकिन अब इस केस में एक बहुत बड़ा अपडेट आया है। इस घिनौनी वारदात के मुख्य आरोपी प्रभास मंडल (Prabhas Mandal) की एक पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई है। पुलिस जब उसे उस जगह पर ले गई थी जहां उसने इस वारदात को अंजाम दिया था, तो उसने भागने की कोशिश की और पुलिस पर ही गोली चला दी। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान और सरल भाषा में समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या था, आधी रात को एनकाउंटर कैसे हुआ और पुलिस की जांच में क्या-क्या बातें सामने आई हैं।
क्या है पूरा मामला? (4 जुलाई की वो खौफनाक शाम)
इस पूरी घटना की शुरुआत 4 जुलाई 2026 से होती है। दक्षिण 24 परगना जिले के बरुईपुर इलाके से शाम करीब 6 बजे एक 12 साल की मासूम बच्ची अचानक लापता हो गई।
परिवार वाले उसे हर जगह ढूंढते रहे, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। अगले दिन यानी 5 जुलाई को बच्ची का शव बरुईपुर के ही एक तालाब से बरामद हुआ। जब परिजनों और पुलिस ने शव देखा तो पता चला कि बच्ची के साथ सिर्फ हत्या नहीं, बल्कि रेप भी किया गया था। इस घटना के बाद इलाके में भारी रोष और गुस्सा था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तेजी से कार्रवाई की और मुख्य आरोपी प्रभास मंडल समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
आधी रात को कैसे हुआ एनकाउंटर? (क्राइम सीन पर जो हुआ)
इस तरह के संगीन मामलों में पुलिस अक्सर आरोपियों को ‘क्राइम स्पॉट’ (जहां वारदात हुई थी) पर ले जाती है, ताकि यह समझा जा सके कि अपराधी ने घटना को कैसे अंजाम दिया। इसे ‘क्राइम सीन रिक्रिएशन’ कहा जाता है।
बंगाल पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक:
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समय और जगह: 8 जुलाई की रात करीब 12:45 बजे बरुईपुर पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारी अपनी टीम के साथ आरोपी प्रभास मंडल को लेकर सूर्यापुर स्थित क्राइम स्पॉट पर पहुंचे।
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हथियार छीनना: पुलिस अभी क्राइम सीन को समझने की तैयारी कर ही रही थी कि अचानक आरोपी प्रभास ने एक पुलिसकर्मी से उसका सरकारी हथियार (बंदूक) छीन लिया।
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फायरिंग और एनकाउंटर: हथियार छीनने के बाद प्रभास ने पुलिस टीम पर एक राउंड गोली चला दी और अंधेरे का फायदा उठाकर वहां से भागने की कोशिश करने लगा। अपनी जान बचाने और आरोपी को रोकने के लिए पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग (Cross-firing) की।
इस जवाबी फायरिंग में एक गोली प्रभास को जा लगी और वह बुरी तरह घायल होकर गिर पड़ा। पुलिस की टीम उसे तुरंत उठाकर बरुईपुर के अस्पताल ले गई, लेकिन वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत (Dead) घोषित कर दिया।
एसआईटी की जांच: पहले से तय था खौफनाक प्लान
इस मामले की जांच सिर्फ लोकल पुलिस नहीं कर रही थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिकारी शुभेंदु सरकार के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था।
जब एसआईटी ने इस केस की जांच शुरू की, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। शुरुआत में ऐसा लग सकता है कि यह वारदात अचानक गुस्से या किसी पल भर की हैवानियत का नतीजा थी, लेकिन पुलिस की जांच कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। एसआईटी का मानना है कि इस वारदात को पूरी प्लानिंग (योजना) के तहत अंजाम दिया गया था।
डिजिटल सबूतों ने खोली पोल (मोबाइल टावर लोकेशन)
आजकल अपराधी कितने भी शातिर क्यों न हों, डिजिटल सबूत उन्हें पकड़वा ही देते हैं।
बरुईपुर जिला पुलिस के सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने जब पकड़े गए तीनों आरोपियों की मोबाइल कॉल डिटेल्स और टावर लोकेशन खंगाली, तो एक बहुत बड़ा सुराग हाथ लगा।
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डेटा से पता चला कि 4 जुलाई को शाम 4:30 बजे से लेकर रात 11:00 बजे तक, तीनों आरोपियों के मोबाइल फोन की टावर लोकेशन एक ही जगह पर थी।
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यह वही समय है जब बच्ची लापता हुई थी और उसके साथ अपराध किया गया था। इस डिजिटल सबूत ने यह पक्का कर दिया कि तीनों आरोपी उस समय एक साथ थे और उन्होंने मिलकर इस पूरी खौफनाक साजिश को अंजाम दिया था।












