Ayodhya Controversy: जब हम किसी मंदिर में जाते हैं, तो अपनी श्रद्धा और हैसियत के हिसाब से दान पेटी में कुछ पैसे जरूर डालते हैं। उस वक्त हमारे मन में सिर्फ यही भाव होता है कि हमारी गाढ़ी कमाई का यह पैसा भगवान के काम आएगा। लेकिन, ज़रा सोचिए, अगर आपको पता चले कि आपके द्वारा दिए गए दान के पैसों में ही हेराफेरी हो रही है, तो आपको कैसा लगेगा?
इन दिनों अयोध्या के भव्य राम मंदिर से एक ऐसी ही हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। राम मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित चोरी और सेंधमारी ने पूरे देश के रामभक्तों को झकझोर कर रख दिया है। जब मामला मीडिया में उछला, तो आनन-फानन में बैठकों का दौर शुरू हो गया। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के अंदर क्या चल रहा है, चंपत राय को लेकर क्या फैसला हुआ है और इस पूरे विवाद में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष सवालों पर क्यों भड़क गए।
चंपत राय और अनिल मिश्रा पर बड़ा एक्शन: सिर्फ पद नहीं, सदस्यता भी गई
चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बहुत ही अहम बैठक बुलाई गई। इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर कर लिए गए।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। मंगलवार को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने मीडिया के सामने स्थिति को और साफ किया। उन्होंने बताया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा को सिर्फ उनके पदों से ही नहीं हटाया गया है, बल्कि उन्हें ट्रस्ट की ‘प्राथमिक सदस्यता’ से भी पूरी तरह बाहर कर दिया गया है।
आसान शब्दों में कहें तो, अब इन दोनों नेताओं का राम मंदिर ट्रस्ट से कोई आधिकारिक लेना-देना नहीं रह गया है। यह फैसला 2025-26 की ऑडिट रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान लिया गया। इस कड़े फैसले से उन सभी अफवाहों पर ब्रेक लग गया है, जिनमें कहा जा रहा था कि इन दोनों को पर्दे के पीछे से बचाने की कोशिश हो रही है।
कोषाध्यक्ष का अजीब तर्क: ‘मैं पुणे में रहता हूं, मुझे क्या पता?’
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष (Treasurer) गोविंद देव गिरि के बयानों और उनके रवैये की हो रही है। किसी भी संस्था में पैसों के लेन-देन और हिसाब-किताब की सबसे बड़ी जिम्मेदारी कोषाध्यक्ष की ही होती है।
लेकिन जब मीडिया ने उनसे इस वित्तीय घोटाले को लेकर उनकी जिम्मेदारी पर सवाल पूछा, तो उनका जवाब काफी हैरान करने वाला था। उन्होंने कहा, “जो पैसा बैंक में जमा ही नहीं हुआ, उसकी निगरानी करना मेरी जिम्मेदारी नहीं थी, क्योंकि मैं पुणे में रहता हूं।”
ज़रा सोचिए, अगर किसी बैंक का मैनेजर यह कह दे कि कैश काउंटर पर क्या हो रहा है मुझे नहीं पता क्योंकि मैं अपने केबिन में बैठा था, तो क्या यह तर्क गले उतरेगा? उनका यह जवाब साफ दिखाता है कि देश के इतने बड़े और महत्वपूर्ण ट्रस्ट में पैसों की निगरानी को लेकर कितनी बड़ी लापरवाही बरती जा रही थी।
कैमरे के सामने क्यों भड़के कोषाध्यक्ष? (रिपोर्टर से तीखी बहस)
कोषाध्यक्ष का सिर्फ बयान ही विवादों में नहीं रहा, बल्कि उनका गुस्सा भी कैमरे में कैद हो गया।
जब वे मीडिया से बात कर रहे थे, तब एबीपी न्यूज़ (ABP News) के रिपोर्टर विशाल पांडेय ने उनसे उनकी खुद की जिम्मेदारी और इस्तीफे को लेकर कुछ तीखे सवाल पूछ लिए। ऐसे सवालों का जवाब देने के बजाय, गोविंद देव गिरि बुरी तरह झुंझला गए। बात इतनी बिगड़ गई कि उन्होंने रिपोर्टर का माइक तक छीनने की कोशिश की। कैमरे के सामने हुई इस हाथापाई जैसी स्थिति ने यह साफ कर दिया कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोग सवालों का सामना करने से घबरा रहे हैं और मीडिया की आवाज को दबाना चाहते हैं।
चंपत राय के बचाव में क्या कहा गया?
भले ही चंपत राय को ट्रस्ट से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया हो, लेकिन कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने उनका बचाव करने की भी कोशिश की।
गिरि ने कहा कि चंपत राय ने खुद चोरी नहीं की है, बल्कि “उन्होंने जिन लोगों पर भरोसा किया था, उन्हीं लोगों ने उनके साथ विश्वासघात किया है।” हालांकि, विपक्ष और आम जनता इस दलील को मानने के लिए तैयार नहीं है। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ मुख्य आरोपियों और अपनी कमियों पर पर्दा डालने की एक कोशिश है।
जनता के उठते सवाल और आगे की राह
राम मंदिर का निर्माण पूरे देश के लिए एक गर्व का विषय रहा है। सत्ताधारी दल (बीजेपी) ने भी इस मंदिर निर्माण को अपनी एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया था। लेकिन अब जब चढ़ावे में घोटाले की बात सामने आई है, तो राजनेताओं की तरफ से जो चुप्पी छाई हुई है, वह कई सवाल खड़े कर रही है।
आज देश का हर आम नागरिक और श्रद्धालु यही पूछ रहा है कि क्या सिर्फ दो लोगों के इस्तीफे से रामलला के खजाने में हुई इस लूट का हिसाब बराबर हो जाएगा? क्या आस्था के नाम पर जो पैसा इकट्ठा हुआ, उसकी रखवाली के लिए कोई ठोस सिस्टम नहीं होना चाहिए?












