Strait of Hormuz Dispute: अगर आप अंतरराष्ट्रीय राजनीति और दुनिया भर की खबरों पर नजर रखते हैं, तो आपको पता होगा कि मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में शांति बहुत मुश्किल से आती है और बहुत जल्दी टूट भी जाती है। अभी कुछ ही समय पहले अमेरिका (USA) और ईरान (Iran) के बीच शांति समझौते की बातें हो रही थीं, लेकिन अब हालात फिर से एक खतरनाक युद्ध के मुहाने पर आ खड़े हुए हैं।
अमेरिका ने इस बार बेहद सख्त रुख अपनाते हुए ईरान को सीधे तौर पर 24 घंटे का अल्टीमेटम (चेतावनी) दे दिया है। यह पूरा मामला समुद्र के एक बेहद अहम रास्ते से जुड़ा है। अमेरिका ने साफ कह दिया है कि अगर ईरान ने उसकी बात नहीं मानी, तो इसके नतीजे बहुत गंभीर होंगे। चलिए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ जो बात अल्टीमेटम तक पहुंच गई, और इस लड़ाई का दुनिया (और आपकी जेब) पर क्या असर पड़ सकता है।
अमेरिका का 24 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम क्या है?
एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने ईरान को एक बहुत ही स्पष्ट और कड़ा संदेश भेजा है। अमेरिका ने ईरान से कहा है कि वह 24 घंटे के अंदर पूरी दुनिया के सामने आकर (सार्वजनिक रूप से) यह घोषणा करे कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) का रास्ता सभी व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला रहेगा।
अमेरिका ने यह संदेश सीधे और कुछ क्षेत्रीय मध्यस्थों (बिचौलियों) के जरिए ईरान तक पहुंचाया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने तो यहां तक चेतावनी दे दी है कि, “अगर कल तक ईरान ने इसे अपनी आधिकारिक स्थिति नहीं बनाया, तो आने वाला दिन ईरान के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं होगा।” यह सीधे तौर पर एक सैन्य कार्रवाई की धमकी मानी जा रही है।
अमेरिका ने ईरान के सामने क्या 3 बड़ी शर्तें रखी हैं?
अमेरिका ने ईरान के सामने सिर्फ रास्ता खोलने की बात नहीं की है, बल्कि तीन बहुत ही स्पष्ट मांगें रखी हैं:
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सुरक्षित आवाजाही: ईरान खुलेआम यह भरोसा दिलाए कि उस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले किसी भी कमर्शियल (व्यापारिक) जहाज पर कोई हमला नहीं किया जाएगा।
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अपनी गलती मानना: अमेरिका चाहता है कि ईरान यह स्वीकार करे कि उसने पिछले दिनों जहाजों पर जो भी कार्रवाई की थी, वह गलत थी।
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कोई ‘टोल टैक्स’ नहीं: ईरान को यह गारंटी देनी होगी कि वह इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले किसी भी जहाज से कोई शुल्क (Toll) या टैक्स नहीं वसूलेगा।
आखिर अमेरिका को क्यों आया इतना गुस्सा? (समझौते का उल्लंघन)
शायद आप सोचें कि अमेरिका अचानक इतना आक्रामक क्यों हो गया? दरअसल, पिछले महीने ही दोनों देशों के बीच एक ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) यानी समझौता हुआ था।
लेकिन अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने इस समझौते का खुला उल्लंघन किया है। ईरान ने उस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले कारोबारी जहाजों को अपना निशाना बनाया। ईरान की इन्ही हरकतों की वजह से अमेरिकी सेना को मजबूरन दो बार पलटवार (जवाबी सैन्य कार्रवाई) करना पड़ा। अब अमेरिका चाहता है कि यह लुका-छिपी का खेल बंद हो और ईरान दुनिया के सामने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा की लिखित गारंटी दे।
ओमान में होने वाली बैठक पर क्यों टिकी हैं दुनिया की नज़रें?
इन तनावपूर्ण हालातों के बीच आज (शनिवार) ओमान की राजधानी मस्कट में एक बहुत ही अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ओमान के बड़े अधिकारी हिस्सा लेंगे।
ईरान के मीडिया का कहना है कि यह बैठक पिछले एक-दो महीनों से चल रही वार्ताओं का ही हिस्सा है। लेकिन अमेरिका पूरी उम्मीद लगाए बैठा है कि ओमान की मध्यस्थता (बीच-बचाव) से ईरान इस बैठक में ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ (समुद्र में बिना रोक-टोक चलने की आजादी) पर अपनी सहमति जता देगा। इस बैठक से ही तय होगा कि मिडिल ईस्ट में शांति रहेगी या फिर नई जंग छिड़ेगी।
आसान भाषा में समझें: क्या है ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ और यह इतना अहम क्यों है?
अब आप सोच रहे होंगे कि यह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ आखिर क्या बला है, जिस पर दुनिया के दो बड़े देश लड़ने को तैयार हैं?
आसान शब्दों में समझें तो यह समुद्र का एक बहुत ही पतला सा रास्ता है, लेकिन दुनिया के व्यापार के लिए यह एक ‘मेन हाईवे’ की तरह काम करता है। पूरी दुनिया में जो तेल और गैस की सप्लाई होती है, उसका लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
याद हो तो इस साल फरवरी के अंत में जब अमेरिका और इजरायल ने अपना सैन्य अभियान चलाया था, तो गुस्से में आकर ईरान ने इस अहम समुद्री रास्ते को लगभग बंद कर दिया था। आम आदमी पर असर: अगर यह रास्ता बंद रहता है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई रुक जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि भारत जैसे देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम रातों-रात आसमान छूने लगेंगे, जिससे भयंकर महंगाई आ सकती है।













