Dhanushkodi Travel Guide: हमारा भारत विविधताओं से भरा देश है। यहाँ आपको बर्फ से ढके पहाड़, खूबसूरत रेगिस्तान और दूर तक फैले नीले समंदर, सब कुछ देखने को मिल जाएगा। यही वजह है कि घूमने-फिरने के शौकीन लोगों के लिए भारत किसी जन्नत से कम नहीं है। हमारे देश में कई ऐसे रेलवे स्टेशन भी हैं जो अपने इतिहास और अपनी बनावट के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं।
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि भारत के साउथ (दक्षिण) बॉर्डर पर एक ऐसा रेलवे स्टेशन और जगह भी है, जहां से हमारा पड़ोसी देश श्रीलंका मात्र 24 किलोमीटर की दूरी पर है? आमतौर पर जब हमें विदेश जाने का ख्याल आता है, तो हम फ्लाइट की टिकट बुक करने के बारे में सोचते हैं। लेकिन सोचिए, आप अपनी ही जमीन पर खड़े हों और सामने समुद्र के उस पार आपको दूसरा देश नजर आ जाए! आइए, आज एक दोस्त की तरह आपको इस दिलचस्प और खूबसूरत जगह की पूरी कहानी बताते हैं।
कौन सा है वो रेलवे स्टेशन और जगह?
हम जिस जगह की बात कर रहे हैं, वह तमिलनाडु का बेहद पवित्र शहर ‘रामेश्वरम’ और उससे थोड़ा आगे स्थित ‘धनुषकोडी’ है। रामेश्वरम रेलवे स्टेशन को भारत के सबसे खास और प्रमुख रेलवे स्टेशनों में गिना जाता है।
यह स्टेशन ‘पंबन आइलैंड’ पर मौजूद है और मुख्य भारत से यह प्रसिद्ध ‘पंबन रेल ब्रिज’ के जरिए जुड़ा हुआ है। जब ट्रेन समुद्र के बीचों-बीच बने इस पंबन ब्रिज से गुजरती है, तो खिड़की से बाहर का नजारा देखना किसी शानदार एडवेंचर से कम नहीं होता। चारों तरफ नीला पानी और बीच से गुजरती ट्रेन, यह अनुभव जिंदगी भर याद रहता है। रामेश्वरम को ही इस दिशा में भारत का आखिरी बड़ा रेलवे स्टेशन माना जाता है।
आखिर सिर्फ 24 किलोमीटर दूर कैसे है श्रीलंका?
रामेश्वरम से थोड़ा और आगे जाने पर ‘धनुषकोडी’ नाम की जगह आती है। यह भारत का अंतिम छोर है। आपको जानकर हैरानी होगी कि धनुषकोडी से श्रीलंका के ‘तलाईमन्नार’ की समुद्री दूरी केवल 24 से 30 किलोमीटर के बीच है।
यही वह इलाका है जहां ऐतिहासिक ‘राम सेतु’ मौजूद है, जिसे दुनिया एडम्स ब्रिज (Adam’s Bridge) के नाम से भी जानती है। भौगोलिक रूप से भारत और श्रीलंका के बीच की सबसे कम दूरी इसी जगह से है। साफ मौसम वाले दिनों में यहां से श्रीलंका के तटीय इलाके का अहसास बड़ी आसानी से किया जा सकता है।
जब भारत से श्रीलंका के बीच चलती थी ट्रेन और नाव
आज हमें भले ही श्रीलंका जाने के लिए फ्लाइट लेनी पड़ती है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब भारत और श्रीलंका के बीच आना-जाना बहुत आसान था।
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि 1964 से पहले लोग ट्रेन से सीधे धनुषकोडी तक पहुंच जाते थे। वहां से यात्रियों के लिए फेरी (बड़ी नाव) सेवा चलती थी, जो उन्हें सीधे श्रीलंका के तलाईमन्नार ले जाती थी। लेकिन साल 1964 में एक भयानक समुद्री चक्रवात (तूफान) आया। इस तूफान ने धनुषकोडी शहर को पूरी तरह से उजाड़ दिया। रेलवे ट्रैक, स्टेशन और इमारतें सब समुद्र में बह गईं। उसके बाद से यह ट्रेन और फेरी की सेवा हमेशा के लिए बंद हो गई और धनुषकोडी एक ‘घोस्ट टाउन’ (वीरान शहर) बन गया।
धनुषकोडी: जहां मिलते हैं दो महासागर
अगर आप कभी धनुषकोडी गए हैं, तो आपने महसूस किया होगा कि यह जगह भारत की सबसे खूबसूरत और शांत जगहों में से एक है।
यह एक पतली सी जमीन की पट्टी है। इसके एक तरफ बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) का शांत पानी है और दूसरी तरफ हिंद महासागर (Indian Ocean) की तेज लहरें हैं। इस पतली सी सड़क पर ड्राइव करते हुए आपको ऐसा लगेगा जैसे आप सीधे समुद्र को चीरते हुए आगे बढ़ रहे हों। कुदरत का ऐसा नजारा भारत में और कहीं देखने को नहीं मिलता।
क्या हम यहां से सीधे श्रीलंका जा सकते हैं?
कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि जब दूरी सिर्फ 24 किलोमीटर है, तो क्या हम कोई नाव लेकर या पैदल (राम सेतु के रास्ते) श्रीलंका जा सकते हैं?
इसका सीधा सा जवाब है- नहीं। भले ही श्रीलंका यहां से बहुत करीब है, लेकिन वह एक दूसरा देश है। वहां जाने के लिए आपको आज भी पासपोर्ट, वीजा और इंटरनेशनल ट्रेवल के सभी कानूनी नियमों का पालन करना होगा। आप यहां से कोई ऑटो, कैब या छोटी नाव लेकर गैरकानूनी तरीके से बॉर्डर पार नहीं कर सकते। यहां भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड की कड़ी सुरक्षा रहती है।
रामेश्वरम और धनुषकोडी जाएं तो क्या-क्या देखें?
अगर आप इस बार रामेश्वरम और धनुषकोडी की ट्रिप प्लान कर रहे हैं, तो इन जगहों पर जाना बिल्कुल मत भूलिएगा:
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रामनाथस्वामी मंदिर: यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और अपने लंबे कॉरिडोर के लिए दुनिया भर में मशहूर है।
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पंबन ब्रिज: समुद्र के ऊपर बना यह पुल इंजीनियरिंग का एक शानदार नमूना है।
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धनुषकोडी बीच: यहां आप दो महासागरों का मिलन देख सकते हैं और शांति के पल बिता सकते हैं।
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अरिचल मुनई पॉइंट: यह धनुषकोडी का बिल्कुल आखिरी किनारा है।
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कोथंडारामस्वामी मंदिर: यह मंदिर 1964 के तूफान में भी सुरक्षित बच गया था और इसका गहरा ऐतिहासिक महत्व है।













