Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर जो विवाद शुरू हुआ था, वह हर दिन एक नया मोड़ ले रहा है। देश के करोड़ों रामभक्तों की आस्था के साथ हुए इस धोखे की जांच कर रही एसआईटी (SIT) रोज नए और चौंकाने वाले खुलासे कर रही है। एक तरफ जहां जांच एजेंसियां चोरी हुए पैसों का पता लगा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ राम मंदिर में दान गिनने वाले कर्मचारियों ने एक साथ काम छोड़कर प्रशासन की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
अगर आप भी सोच रहे हैं कि आखिर भगवान के खजाने में सेंध कैसे लगी और चुराए गए पैसों का क्या हुआ, तो आइए एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि इस पूरे मामले में अब तक क्या-क्या हुआ है।
क्या है पूरा मामला? 20 से ज्यादा कर्मचारियों ने क्यों दिया इस्तीफा?
राम मंदिर के ‘गणना कक्ष’ (जहां चढ़ावे का पैसा गिना जाता है) में काम करने वाले 20 से ज्यादा कर्मचारियों ने अचानक अपना काम छोड़ दिया है।
इन कर्मचारियों का सीधा सा आरोप है कि उन पर काम का दबाव (वर्कलोड) बहुत ज्यादा बढ़ा दिया गया है, लेकिन उन्हें उनकी मेहनत के हिसाब से पेमेंट (सैलरी) नहीं दी जा रही है। अपनी इसी नाराजगी के चलते इन सभी कर्मचारियों ने इतने बड़े स्तर पर एक साथ इस्तीफा दे दिया है।
शिफ्ट और वर्कलोड: अब कैसे होगी चढ़ावे की गिनती?
कर्मचारियों के इस तरह काम छोड़ने से मंदिर प्रशासन के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है।
-
पहले क्या होता था: पहले चढ़ावे की गिनती दो शिफ्टों में होती थी। पहली शिफ्ट सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक चलती थी।
-
अब क्या होगा: स्टाफ की कमी के कारण अब दो शिफ्ट की बजाय सिर्फ एक ही शिफ्ट कर दी गई है। गिनती का नया समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक तय किया गया है।
पहली और दूसरी शिफ्ट के जो गिने-चुने लोग बचे हैं, उन्हें आपस में मिला (मर्ज कर) दिया गया है। अब टीम में सिर्फ 15-16 लोग ही रह गए हैं। जाहिर सी बात है, जब तक नए लोगों की भर्ती नहीं होती, तब तक बचे हुए इन कर्मचारियों पर काम का बोझ काफी ज्यादा रहेगा।
शेयर बाजार और ब्याज का खेल: कहां गया भगवान का पैसा?
चंदा चोरी मामले में सबसे हैरान करने वाला खुलासा पैसों के इस्तेमाल को लेकर हुआ है। एसआईटी (SIT) की जांच का दायरा जैसे-जैसे बढ़ रहा है, पता चला है कि आरोपी कोई साधारण चोर नहीं थे।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने राम मंदिर से चुराए गए दान के पैसों का एक बड़ा हिस्सा शेयर बाजार (Stock Market) में लगा दिया था, ताकि वे उससे और ज्यादा मुनाफा कमा सकें। सिर्फ यही नहीं, जो पैसा बच गया था, उसे इन लोगों ने बाजार में लोगों को ‘ब्याज’ (Interest) पर उधार बांट दिया था। पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है और आरोपियों के करीबियों व जानने वालों के बैंक अकाउंट्स को खंगाल रही है, ताकि पैसे की पूरी रिकवरी की जा सके।
सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? (SIT के खुलासे)
राम मंदिर जैसे हाई-सिक्योरिटी जोन में इतनी बड़ी चोरी होना कोई छोटी बात नहीं है। SIT ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि इस गड़बड़ी के लिए ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा और काउंटिंग इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव सीधे तौर पर जिम्मेदार थे।
अनिल मिश्रा की जिम्मेदारी फाइनेंस (वित्तीय मामलों) की देखरेख करना, नकदी इकट्ठा करने के प्रोसेस पर नजर रखना और बैंक के साथ मिलकर ‘नियम’ (SOP) बनाना था। लेकिन एसआईटी का कहना है कि इन दोनों अधिकारियों ने सुरक्षा के जरूरी नियमों को ठीक से लागू ही नहीं किया, जिसका फायदा उठाकर यह गबन हुआ।
बिना तलाशी और बायोमेट्रिक के हो रहा था काम
एसआईटी की रिपोर्ट में कुछ ऐसी बातें सामने आई हैं, जो किसी भी आम आदमी को हैरान कर देंगी:
-
कोई तलाशी नहीं: अनिल मिश्रा को अंदर के लोगों से यह पता चल चुका था कि गिनती करने वाले कर्मचारियों की जरूरी ‘चेकिंग या तलाशी’ नहीं ली जा रही है। फिर भी, उन्होंने इस नियम को सख्ती से लागू करवाने के लिए कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया।
-
नियमों की अनदेखी: गिनती वाले कमरे में बायोमेट्रिक अटेंडेंस (Biometric Attendance), एक तय ड्रेस कोड और निजी सामान (जैसे फोन या बैग) ले जाने पर रोक होनी चाहिए थी, लेकिन ये नियम कभी लागू ही नहीं किए गए।
-
रिकॉर्ड में कमी: किस हुंडी (दान पेटी) से कितना पैसा निकला और किस कीमत के कितने नोट थे, इसका सही तरीके से कोई रोजाना डॉक्यूमेंटेशन (Documentation) नहीं किया गया।











