Bengal Solar Scam: फिल्मों में आपने अक्सर देखा होगा कि जब कोई अपराधी पुलिस से बचने की कोशिश करता है, तो वह अपना हुलिया बदल लेता है और किसी दूर शहर में जाकर छिप जाता है। लेकिन असल जिंदगी में भी बिल्कुल ऐसा ही हुआ है।
पश्चिम बंगाल में इन दिनों एक बड़े घोटाले की खूब चर्चा है— ‘सोलर ऊर्जा परियोजना घोटाला’। इस मामले में पुलिस को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। आरामबाग नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन और टीएमसी (TMC) नेता स्वपन नंदी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन उन्हें पकड़ना इतना आसान नहीं था। गिरफ्तारी से बचने के लिए स्वपन नंदी अपना राज्य छोड़कर हजारों किलोमीटर दूर भाग गए थे। आइए, एक आम आदमी की भाषा में आपको पूरी कहानी बताते हैं कि यह घोटाला क्या था, पैसों की हेराफेरी कैसे हुई और पुलिस ने इस नेता को कैसे खोज निकाला।
मूंछ मुंडवाकर और हुलिया बदलकर केरल भागा, फिर कैसे पकड़ा गया?
जब पश्चिम बंगाल में ‘ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट’ में हुए इस करोड़ों के घोटाले की जांच तेज हुई, तो स्वपन नंदी को भनक लग गई कि पुलिस उनके दरवाजे तक पहुंचने वाली है। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह अंडरग्राउंड (फरार) हो गए।
अपनी पहचान छिपाने के लिए उन्होंने अपना हुलिया पूरी तरह से बदल लिया। यहां तक कि उन्होंने अपनी मूंछें भी मुंडवा दीं, ताकि कोई उन्हें पहचान न सके। वह बंगाल से भागकर लगभग 2300 किलोमीटर दूर दक्षिण भारत के राज्य केरल पहुंच गए।
उन्हें लगा कि इतनी दूर उन्हें कोई नहीं खोज पाएगा। लेकिन कहते हैं न कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। बंगाल पुलिस की जांच एजेंसियों ने टेक्निकल सर्विलांस (मोबाइल लोकेशन और डिजिटल ट्रैकिंग) की मदद से उनकी लोकेशन का पता लगा लिया और केरल में ही उन्हें धर दबोचा। अब पुलिस उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर पश्चिम बंगाल ला रही है, ताकि कोर्ट में पेश करके उनसे पूछताछ की जा सके।
क्या है करोड़ों का ‘ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट’ घोटाला?
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये घोटाला है क्या और इसमें कितने पैसों का खेल हुआ है?
दरअसल, आरामबाग नगर पालिका ने ‘ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट’ नाम से एक योजना शुरू की थी। इसका मकसद था सरकारी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों की छतों पर सोलर पैनल (सौर ऊर्जा प्लेट) लगाना।
योजना का टारगेट: इस योजना के तहत 3 प्राथमिक विद्यालयों (प्राइमरी स्कूलों) और आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ-साथ 11 उच्च प्राथमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में सोलर सिस्टम लगाया जाना था।
बिजली का उत्पादन: इस प्रोजेक्ट से कुल 764.46 किलोवाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य रखा गया था।
बिजली का इस्तेमाल: इस सोलर बिजली से स्कूलों की जरूरतें पूरी होनी थीं और बची हुई बिजली से सड़कों की लाइटें (स्ट्रीट लाइट्स) जलनी थीं।
लेकिन आरोप है कि इस ई-टेंडर और प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय (पैसों की) और प्रशासनिक गड़बड़ियां की गईं। जिस पैसे का इस्तेमाल बच्चों के स्कूलों को रोशन करने के लिए होना था, उसमें जमकर भ्रष्टाचार किया गया।
इंजीनियर से लेकर ठेकेदार तक, अब तक 3 और गिरफ्तार
स्वपन नंदी इस मामले में गिरफ्तार होने वाले पहले व्यक्ति नहीं हैं। पुलिस के अनुसार, इस घोटाले की कड़ियां बहुत गहराई तक जुड़ी हुई हैं। स्वपन नंदी से पहले इस मामले में तीन और लोगों को अरेस्ट किया जा चुका है:
एक अस्थायी नगर अभियंता (Municipal Engineer)
एक अस्थायी विद्युत पर्यवेक्षक (Electrical Supervisor)
एक ठेकेदार (Contractor)
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि टेंडर पास करने के फैसले कैसे लिए गए और प्रोजेक्ट का पैसा कहां-कहां बांटा गया। अधिकारियों का कहना है कि पहले पकड़े गए इन तीनों आरोपियों ने पूछताछ में कई बड़े राज उगले हैं। इन्हीं जानकारियों के आधार पर स्वपन नंदी की तलाश तेज की गई थी। अब पुलिस इन सभी को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने की तैयारी में है।
अपनों ने ही खोली पोल: कैसे शुरू हुई इस घोटाले की जांच?
इस कहानी में सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस घोटाले की शिकायत किसी विपक्षी दल ने नहीं, बल्कि खुद उनकी अपनी पार्टी (TMC) के एक नेता ने की थी।
जब स्वपन नंदी को नगर पालिका के चेयरमैन पद से हटाया गया, तो उनकी जगह टीएमसी नेता समीर भंडारी ने पदभार संभाला। कुर्सी संभालने के बाद समीर भंडारी को इस ‘ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट’ में पैसों की हेराफेरी का पता चला। उन्होंने ही इस घोटाले की शिकायत दर्ज कराई। इसी शिकायत के बाद जांच शुरू हुई और पिछले कुछ महीनों में इस मामले ने रफ्तार पकड़ ली।
आगे क्या होगा?
पुलिस और जांच एजेंसियों का फोकस अब इस प्रोजेक्ट से जुड़े बैंक खातों, पैसों के लेनदेन (ट्रांजैक्शन) और टेंडर पास करने वाले दस्तावेजों पर है। अधिकारियों का मानना है कि केरल से स्वपन नंदी की गिरफ्तारी के बाद इस घोटाले की और भी कई परतें खुल सकती हैं। क्या इसमें कुछ और बड़े नेताओं या अधिकारियों के नाम शामिल हैं? यह तो आने वाले वक्त और पुलिस की पूछताछ के बाद ही साफ हो पाएगा।













