Ram Mandir Donation Row: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान की चोरी का मामला इन दिनों यूपी की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। जब से इस गड़बड़ी की खबर बाहर आई है, तब से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया, और अब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मामले में अपनी एंट्री मार ली है। पश्चिमी यूपी के बिजनौर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने योगी सरकार की ‘बुलडोजर और एनकाउंटर नीति’ पर बहुत ही तीखा और सीधा तंज कसा है। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि ओवैसी ने क्या-क्या कहा है और इस पूरे मामले में अब तक पुलिस ने क्या कार्रवाई की है।
ओवैसी का तीखा तंज: ‘मुसलमान होता तो एनकाउंटर हो जाता’
बिजनौर की रैली में असदुद्दीन ओवैसी अपने पूरे पुराने और आक्रामक अंदाज में नजर आए। राम मंदिर में हुई करोड़ों की चोरी पर योगी सरकार को घेरते हुए उन्होंने एक ऐसा बयान दिया, जिसकी अब हर तरफ चर्चा हो रही है।
ओवैसी ने मंच से कहा, “अगर राम मंदिर ट्रस्ट में कोई मुसलमान सदस्य होता, तो अब तक सरकार उसका एनकाउंटर कर चुकी होती और उसके घर पर बुलडोजर चल चुका होता।”
उनका सीधा आरोप था कि जब बात मुसलमानों की आती है तो सरकार तुरंत बुलडोजर लेकर पहुंच जाती है, लेकिन इस मामले में पुलिस हाई प्रोफाइल आरोपियों की हिरासत (कस्टडी) तक नहीं मांग रही है। ओवैसी ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि सरकार को चाहिए था कि वह किसी एक मुस्लिम को ट्रस्टी बना देती, फिर उसका एनकाउंटर कर उसका घर ढहा देती और केस को वहीं खत्म कर देती। उन्होंने आरोप लगाया कि फिलहाल तो आरोपी आराम से मजे कर रहे हैं।
चंपत राय के इस्तीफे पर क्या बोले ओवैसी?
राम मंदिर दान विवाद के तूल पकड़ने के बाद, ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
इस बात का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा, “चंपत राय मजे कर रहे हैं।” उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी चोरी सामने आने के बाद भी आरोपियों पर वैसी सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है, जैसी सरकार अक्सर दावे करती है। उन्होंने कुछ दिन पहले भी योगी सरकार से पूछा था कि क्या अब इन आरोपियों के घरों पर भी गोली चलेगी या बुलडोजर चलाया जाएगा?
कैसे सामने आया यह चंदा चोरी का पूरा मामला?
अगर आप सोच रहे हैं कि यह पूरा मामला शुरू कैसे हुआ, तो आपको बता दें कि सबसे पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चढ़ावे में हो रही कथित गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाए थे।
अखिलेश यादव के कड़े सवालों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बाद, योगी सरकार तुरंत हरकत में आई। मामले की सच्चाई जानने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। एसआईटी की शुरुआती जांच में ही सुरक्षा और मंदिर मैनेजमेंट में कई बड़ी खामियां सामने आईं, जिसने पूरे ट्रस्ट को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया।
अब तक क्या कार्रवाई हुई है? (8 लोगों की गिरफ्तारी)
चंदा चोरी के इस मामले में पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। ट्रस्ट के एक सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर 25 जून को इस मामले में पहली आधिकारिक एफआईआर (FIR) दर्ज की गई।
इस एफआईआर में उन 8 लोगों को नामजद किया गया, जिनकी ड्यूटी राम मंदिर में दान के रूप में मिले कैश और कीमती चीजों को गिनने में लगी थी। इन 8 कर्मचारियों के नाम हैं— अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव (उर्फ टिन्नू)। इन सभी आठ आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।
राम मंदिर लोगों की गहरी आस्था का विषय है। ऐसे में वहां के चढ़ावे में चोरी होना सिर्फ पैसों का मामला नहीं, बल्कि भरोसे के टूटने का मामला है। ओवैसी का यह बयान साफ दिखाता है कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष सरकार को कानून व्यवस्था और ‘बुलडोजर एक्शन’ के मुद्दे पर घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता। अब देखना यह है कि एसआईटी की आगे की जांच में और क्या-क्या नए खुलासे होते हैं।













