Geopolitics: भारत और हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश के रिश्ते हमेशा से ही चर्चा का विषय रहे हैं। पिछले कुछ समय से बांग्लादेश की राजनीति में जो उथल-पुथल मची है, उसका सीधा असर दोनों देशों के संबंधों पर भी दिख रहा है। इन दिनों एक खास मुद्दा सबसे ज्यादा गरमाया हुआ है, और वह है ‘तीस्ता नदी परियोजना’ (Teesta Master Plan)।
हाल ही में बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी ‘जमात-ए-इस्लामी’ के प्रमुख शफीकुर रहमान ने भारत के साथ रिश्तों और इस तीस्ता प्रोजेक्ट को लेकर एक बहुत ही बेबाक बयान दिया है। ढाका के संसद भवन से उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब बांग्लादेश की नई सरकार इस प्रोजेक्ट के लिए भारत के बजाय चीन की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा रही है। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि जमात चीफ ने क्या कहा है, ‘आम भेजने’ वाले उनके बयान का क्या मतलब है, और इस पूरे मामले में भारत की असली चिंता क्या है।
भारत के साथ रिश्तों पर क्या बोले शफीकुर रहमान?
न्यूज़ एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत के दौरान शफीकुर रहमान ने सबसे पहले भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक रिश्तों पर अपनी बात रखी।
उन्होंने यह बात मानी कि भारत, बांग्लादेश का सबसे करीबी और अहम पड़ोसी है। रहमान ने कहा कि उनका देश अपने सभी पड़ोसियों का पूरा सम्मान करता है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा संदेश भी दे दिया। उनका कहना था, “हम भारत से भी यही उम्मीद करते हैं कि हमारे बीच का रिश्ता भरोसे, बराबरी और आपसी सम्मान पर टिका हो।”
आसान शब्दों में कहें तो, बांग्लादेश यह जताना चाहता है कि वह भारत के साथ दोस्ताना रिश्ते तो चाहता है, लेकिन वह किसी भी तरह का ‘बड़े भाई’ वाला रवैया या दबाव बर्दाश्त नहीं करेगा।
तीस्ता प्रोजेक्ट पर दो टूक: ‘नाराज हुए तो आम भेज देंगे’
जब बातचीत ‘तीस्ता मास्टर प्लान’ पर पहुंची, तो शफीकुर रहमान का लहजा काफी स्पष्ट था। उन्होंने साफ कर दिया कि तीस्ता नदी का प्रबंधन (मैनेजमेंट) पूरी तरह से बांग्लादेश का घरेलू और आंतरिक मामला है।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश इस प्रोजेक्ट को अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही पूरा करेगा। उनकी पार्टी भी इस प्रोजेक्ट के पूरे समर्थन में है क्योंकि इससे उनके देश के लोगों का ही भला होना है।
इसी दौरान उन्होंने थोड़ा हल्के और चुटीले अंदाज में भारत की तरफ इशारा करते हुए कहा कि, “इस प्रोजेक्ट को लेकर हमारे दोस्तों (भारत) को दुखी या परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। अगर फिर भी कोई इस बात से नाराज होता है, तो हम उन्हें मनाने के लिए राजशाही के मशहूर आम भेज देंगे।”
राजनीति की भाषा में इस ‘आम भेजने’ वाले तंज का सीधा मतलब यह है कि बांग्लादेश इस मुद्दे पर भारत के ऐतराज को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहा है।
आखिर भारत की असली टेंशन क्या है? (समझें सिलीगुड़ी कॉरिडोर का गणित)
शायद आप सोच रहे होंगे कि तीस्ता नदी पर अगर बांग्लादेश कोई काम कर रहा है, तो भारत को इससे क्या परेशानी है? इसके पीछे पानी से ज्यादा ‘सुरक्षा’ का एक बहुत बड़ा कारण छिपा है।
तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में जाती है। भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता के पानी के बंटवारे को लेकर बहुत पुरानी बहस चल रही है। लेकिन भारत की मौजूदा चिंता की असली वजह चीन (China) है।
बांग्लादेश जिस तीस्ता मास्टर प्लान पर काम कर रहा है, वह जगह भारत के ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ (Siliguri Corridor) के बिल्कुल पास है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर को ‘चिकन नेक’ (Chicken’s Neck) भी कहा जाता है। यह भारत का वह बेहद पतला और रणनीतिक इलाका है, जो मुख्य भारत को हमारे पूर्वोत्तर राज्यों (Northeast states) से जोड़ता है। अगर चीन तीस्ता प्रोजेक्ट के बहाने इस इलाके के पास आकर बैठ जाता है, तो यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन सकता है।
शेख हसीना से तारिक रहमान तक: कैसे चीन के पाले में चली गई गेंद?
इस पूरे खेल को समझने के लिए थोड़ा सा पीछे जाना होगा। अगस्त 2024 से पहले जब बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार थी, तब वह इस तीस्ता प्रोजेक्ट पर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहती थीं।
लेकिन अगस्त 2024 में हुए भारी छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई। इसके बाद मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार आई और अब वहां तारिक रहमान के नेतृत्व वाली पूर्ण बहुमत की सरकार चल रही है। नई सरकार का झुकाव भारत से ज्यादा चीन की तरफ नजर आ रहा है।
हाल ही में जब प्रधानमंत्री तारिक रहमान चीन के दौरे पर गए थे, तब भी इस तीस्ता मास्टर प्लान को लेकर दोनों देशों के बीच गहरी चर्चा हुई थी। शेख हसीना के जाने के बाद जिस तरह से बांग्लादेश इस अहम प्रोजेक्ट को चीन के हाथों में सौंपने की तैयारी कर रहा है, उसी ने भारत की पेशानी पर बल ला दिए हैं।












