Instagram Ad Controversy: आजकल हम सभी के फोन में इंस्टाग्राम (Instagram) और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया ऐप्स मौजूद हैं। हम मानकर चलते हैं कि ये प्लेटफॉर्म हमारे और हमारे घर के बच्चों के लिए सुरक्षित हैं। लेकिन, क्या हो अगर इन्हीं प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के लिए खतरनाक और आपत्तिजनक चीजें विज्ञापन (Ads) के रूप में दिखने लगें?
हाल ही में एक ऐसी ही चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसने देश भर में ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस रिपोर्ट पर गहरी चिंता जताई है और सोशल मीडिया कंपनियों को कटघरे में खड़ा किया है। आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है, ऐसी चूक कैसे हुई और ओवैसी ने टेक कंपनियों से क्या मांग की है।
क्या है पूरा मामला? (इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक विज्ञापन)
यह पूरा विवाद एक हालिया रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में इंस्टाग्राम पर कुछ ऐसे विज्ञापन (Ads) दिखाई दिए हैं, जो बच्चों के यौन शोषण (Child Sexual Abuse Material) से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा दे रहे थे या उससे जुड़े हुए थे।
ज़रा सोचिए, जिस ऐप को करोड़ों लोग और युवा रोज़ाना इस्तेमाल करते हैं, वहां ऐसी गंभीर और गैरकानूनी चीज़ों का विज्ञापन के रूप में आना कितनी बड़ी लापरवाही है। इस खुलासे के बाद बाल अधिकार कार्यकर्ताओं (Child Rights Activists), डिजिटल सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों और आम इंटरनेट यूज़र्स के बीच हड़कंप मच गया है। माता-पिता भी इस बात को लेकर डरे हुए हैं कि उनके बच्चे ऑनलाइन क्या देख रहे हैं।
ओवैसी ने क्या कहा? (सुरक्षा तंत्र पर उठाए सख्त सवाल)
इस गंभीर मुद्दे पर असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस पूरी घटना को बेहद परेशान करने वाला बताया है।
ओवैसी का कहना है कि यह घटना ऑनलाइन सुरक्षा तंत्र (Online Safety Mechanism) की एक बहुत बड़ी नाकामी को दिखाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अब सिर्फ पब्लिक में बयान देकर या झूठे आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। ओवैसी ने मांग की है कि इन बड़ी टेक कंपनियों को ऐसी आपत्तिजनक सामग्री की खुद से पहचान करनी चाहिए, उसे तुरंत ब्लॉक करना चाहिए और जड़ से हटाना चाहिए। उनके अनुसार, बच्चों को ऑनलाइन दुर्व्यवहार से बचाना इन कंपनियों की सबसे पहली प्राथमिकता (Top Priority) होनी चाहिए।
कैसे काम करता है विज्ञापन सिस्टम और कहां हुई चूक?
जब हम इंस्टाग्राम चलाते हैं, तो हमें हमारी पसंद के हिसाब से कई विज्ञापन दिखते हैं। इन कंपनियों के पास एक ऑटोमैटिक सिस्टम (मॉडरेशन सिस्टम) होता है, जिसका काम यह चेक करना होता है कि कोई भी विज्ञापन उनके नियमों के खिलाफ न हो।
विशेषज्ञ यही सवाल उठा रहे हैं कि आखिर बच्चों के शोषण से जुड़े ये खतरनाक विज्ञापन इस चेकिंग सिस्टम की नजरों से कैसे बच निकले? क्या कंपनियों के फिल्टर इतने कमजोर हैं कि कोई भी पैसे देकर कुछ भी प्रमोट कर सकता है? यह एक बहुत बड़ा तकनीकी और नैतिक सवाल है जिसका जवाब इंस्टाग्राम चलाने वाली कंपनी को देना होगा।
सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी पर छिड़ी बहस
ओवैसी की टिप्पणियों ने इस मुद्दे पर राजनीतिक ध्यान भी खींच लिया है। अब इस बात पर फिर से जोरदार बहस शुरू हो गई है कि यूज़र को सुरक्षित रखने की असली जिम्मेदारी किसकी है।
अक्सर सोशल मीडिया कंपनियां कहती हैं कि वे एक सुरक्षित माहौल देने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन जब ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तो उनके दावों की पोल खुल जाती है। ओवैसी ने इस बात पर जोर दिया है कि टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स को अवैध गतिविधियों को सक्रिय रूप से (Proactively) खत्म करना चाहिए। कंपनियों को यह सुनिश्चित करना ही होगा कि उनके सिस्टम का गलत इस्तेमाल न हो सके।











