Personal Finance: आज के समय में हम चाय की टपरी से लेकर बड़े-बड़े मॉल तक, हर जगह पेमेंट के लिए अपना मोबाइल निकालते हैं और क्यूआर कोड (QR Code) स्कैन कर देते हैं। ऐसा लगता है जैसे हमारी जेबों से कैश बिल्कुल गायब सा हो गया है। लेकिन, हाल ही में भारतीय अर्थव्यवस्था और लोगों की आदतों को लेकर एक बहुत ही चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया है।
बाजार के जानकारों ने गौर किया है कि देश में लोग अब अपने घरों में पहले के मुकाबले ज्यादा कैश (Cash Holdings) रखने लगे हैं। मजे की बात यह है कि लोग 500 रुपये के बड़े नोट नहीं, बल्कि 100 और 200 रुपये के छोटे नोटों को अपनी अलमारी और गुल्लक में सहेज रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि जब फोन से ही सारे काम हो रहे हैं, तो लोग अचानक छोटे नोट क्यों जमा करने लगे हैं? क्या बाजार में इन नोटों की कमी होने वाली है? आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि इस नए ‘कैश ट्रेंड’ के पीछे की असली कहानी क्या है।
क्या है 100 और 200 रुपये के नोटों का नया ट्रेंड?
अगर हम कुछ साल पीछे जाएं, तो लोगों को बड़े नोट (जैसे 500 या 2000 के नोट) जमा करने का शौक होता था। लेकिन अब चलन बदल गया है। लोगों को समझ आ गया है कि रोजमर्रा के छोटे-मोटे खर्चों, जैसे- सब्जी वाले को देना, दूध वाले का हिसाब करना या किसी इमरजेंसी में छोटी पेमेंट करने के लिए 100 और 200 रुपये के नोट सबसे ज्यादा काम आते हैं। इसलिए, मिडिल क्लास परिवारों में अब इन छोटे नोटों की गड्डियां इमरजेंसी फंड के तौर पर रखी जाने लगी हैं।
आखिर घर में कैश क्यों जमा कर रहे हैं लोग? (दो बड़ी वजहें)
अर्थशास्त्रियों (एक्सपर्ट्स) और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोगों की इस बदलती आदत के पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी वजहें हैं:
1. दुनिया भर में मची उथल-पुथल (ग्लोबल अनिश्चितता)
इन दिनों आप न्यूज़ में देख ही रहे होंगे कि पश्चिम एशिया (Middle East) समेत दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव का माहौल है। जब भी दुनिया में ऐसा कोई भू-राजनीतिक (Geopolitical) संकट आता है, तो उसका असर हर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे अनिश्चितता वाले माहौल में एक आम इंसान को लगता है कि “बुरे वक्त में कैश ही सबसे बड़ा साथी होता है।” इसलिए, सुरक्षा के लिहाज से लोग अपने पास कुछ नकद पैसा रखना पसंद कर रहे हैं।
2. कोविड-19 का डरावना अनुभव (पोस्ट-कोविड अलर्टनेस)
कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन ने हम सभी को बहुत कुछ सिखाया है। उस वक्त कई बार ऐसा हुआ कि एटीएम (ATM) खाली हो गए थे या इंटरनेट सर्वर डाउन होने की वजह से ऑनलाइन पेमेंट नहीं हो पा रहे थे।
उस मुश्किल दौर में जिन लोगों के पास घर में कैश था, उन्हें राशन और दवाइयां खरीदने में आसानी हुई। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि कोविड के बाद से ही लोगों में ‘एहतियात के तौर पर’ (Precautionary motive) कैश रखने की आदत सबसे तेजी से बढ़ी है। लोग अब पहले से ज्यादा अलर्ट हो गए हैं।
क्या यूपीआई (UPI) और डिजिटल पेमेंट से भरोसा उठ गया है?
बिल्कुल नहीं! अगर आपको लग रहा है कि लोग कैश इसलिए रख रहे हैं क्योंकि उनका बैंकिंग सिस्टम या डिजिटल पेमेंट (UPI) से भरोसा उठ गया है, तो आप गलत सोच रहे हैं।
भारत में यूपीआई ट्रांजैक्शन आज भी हर महीने नए रिकॉर्ड तोड़ रहा है। लोग आज भी 90 प्रतिशत पेमेंट ऑनलाइन ही कर रहे हैं। बस फर्क इतना आया है कि लोग अपनी पूरी कमाई बैंक में रखने के बजाय, उसका एक छोटा सा हिस्सा (जैसे 5-10 हजार रुपये) 100 और 200 के नोटों के रूप में घर की अलमारी में ‘बैकअप प्लान’ की तरह रख रहे हैं। यह एक समझदारी भरा वित्तीय कदम (Financial step) है।
क्या सच में बाजार में छोटे नोटों की कमी हो गई है?
जब किसी चीज की मांग बढ़ती है, तो अक्सर अफवाह उड़ने लगती है कि बाजार में उस चीज की कमी हो गई है। 100 और 200 के नोटों को लेकर भी कुछ ऐसी ही चर्चा है।
लेकिन हम आपको साफ कर दें कि इसका सीधा जवाब है— नहीं!
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और हमारे बैंकिंग सिस्टम के पास 100 और 200 रुपये के नोटों की भरपूर मात्रा है। इन नोटों की कोई ‘आधिकारिक कमी’ (Official Shortage) नहीं है। बस हो यह रहा है कि लोग जब बैंक या एटीएम से ये नोट निकाल रहे हैं, तो वे इन्हें बाजार में वापस खर्च करने (सर्कुलेशन) के बजाय घर में जमा कर रहे हैं। इसी वजह से ऐसा लग रहा है कि नोटों की मांग बढ़ गई है।
कुल मिलाकर बात यह है कि घर में 100 और 200 रुपये के नोट रखना किसी घबराहट या आर्थिक मंदी का संकेत नहीं है। यह सिर्फ भारतीय परिवारों की उस पुरानी आदत की वापसी है, जहां हमारी माताएं-दादियां बुरे वक्त के लिए चावल के डिब्बे या साड़ियों के बीच कुछ पैसे छिपाकर रखती थीं। इमरजेंसी के लिए घर में थोड़ा कैश होना एक अच्छी आदत है, लेकिन इसके लिए पैनिक (घबराने) करने या बहुत ज्यादा कैश डंप करने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि हमारा बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह से सुरक्षित और मजबूत है।













