Motivation: किसी भी महिला के लिए मां बनना जिंदगी का सबसे खूबसूरत और नाजुक पल होता है। डिलीवरी के बाद महिलाओं को हफ्तों तक आराम की सलाह दी जाती है। लेकिन जरा सोचिए, कोई महिला बच्चे को जन्म देने के महज दो दिन बाद 200 किलोमीटर का सफर तय करके कोई कठिन परीक्षा देने जाए, तो आप क्या कहेंगे?
तमिलनाडु की रहने वाली 23 साल की श्रीपति (Sreepathi) ने बिल्कुल ऐसा ही किया है। अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने न सिर्फ परीक्षा दी, बल्कि उसे पास करके सिविल जज (Civil Judge) भी बन गईं। श्रीपति तमिलनाडु के ‘मलैयाली’ (Malaiyali) आदिवासी समुदाय की पहली महिला हैं, जो इस मुकाम तक पहुंची हैं। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि एक दूर-दराज के गांव से निकलकर जज की कुर्सी तक पहुंचने का श्रीपति का यह सफर कैसा रहा।
सुविधाओं से कोसों दूर बीता बचपन
श्रीपति की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उनका जन्म तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई जिले के एक बहुत ही पिछड़े गांव ‘धनियाक्कुप्पम’ में हुआ था। यह गांव रिजर्व फॉरेस्ट एरिया (जंगल के इलाके) में आता है।
आप इस गांव के हालात का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि यहां पक्की सड़कें नहीं हैं और सबसे पास का बस स्टैंड भी 15 किलोमीटर दूर है। श्रीपति के पिता मजदूरी और खेती करके घर चलाते थे, और मां एक गृहिणी थीं। परिवार गरीब जरूर था, लेकिन उन्होंने बच्चों की पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया। बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके, इसके लिए परिवार अपना गांव छोड़कर दूसरी जगह शिफ्ट हो गया।
आखिर जज बनने का ही सपना क्यों देखा?
श्रीपति स्कूल के दिनों से ही पढ़ाई में बहुत तेज और शांत स्वभाव की थीं। लेकिन उन्होंने अचानक जज बनने का फैसला नहीं लिया था।
बचपन से ही श्रीपति ने देखा था कि उनके आदिवासी समाज के लोग कानूनी जानकारी न होने के कारण कितनी परेशानियां उठाते हैं। लोग अपने हकों और अधिकारों के बारे में कुछ नहीं जानते थे। कई बार तो न्याय मिलने के बावजूद उन्हें उसका फायदा नहीं मिल पाता था। अपने लोगों की इसी बेबसी को देखकर श्रीपति ने ठान लिया कि वह कानून (Law) की पढ़ाई करेंगी और खुद न्याय व्यवस्था का हिस्सा बनकर अपने समाज की मदद करेंगी।
शादी के बाद पति ने दिया पूरा साथ
अक्सर हमारे समाज में, खासकर ग्रामीण इलाकों में, लड़कियों की शादी होने के बाद उनकी पढ़ाई और करियर पर ब्रेक लग जाता है। श्रीपति की शादी भी काफी कम उम्र में हो गई थी। उनके पति पेशे से एक ट्रक ड्राइवर हैं।
लेकिन श्रीपति की किस्मत अच्छी थी कि उन्हें एक बहुत ही सपोर्टिव परिवार मिला। शादी के बाद भी उनके पति और ससुराल वालों ने उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए पूरा सपोर्ट किया। श्रीपति ने अपनी एलएलबी (LLB) की पढ़ाई पूरी की और तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमीशन (TNPSC) की सिविल जज की परीक्षा की तैयारी में जुट गईं। घर के काम-काज के बीच भी किताबें हमेशा उनके साथ रहीं।
डिलीवरी के सिर्फ 2 दिन बाद तय किया 200 किमी का सफर
श्रीपति की जिंदगी का सबसे बड़ा इम्तिहान नवंबर 2023 में आया। एक तरफ उनकी सिविल जज की परीक्षा सिर पर थी और दूसरी तरफ वह प्रेगनेंट थीं।
परीक्षा से कुछ दिन पहले ही श्रीपति ने एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिया। जिस वक्त महिलाओं को सबसे ज्यादा आराम की जरूरत होती है, उस वक्त श्रीपति ने हार नहीं मानी। अपनी नवजात बच्ची को जन्म देने के सिर्फ दो दिन बाद, वह अपने पति के साथ कार से करीब 200 से 250 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके परीक्षा केंद्र पहुंचीं। उस समय सोशल मीडिया पर उनकी एक तस्वीर बहुत वायरल हुई थी, जिसमें वह अपनी नन्ही सी बच्ची को गोद में लिए नजर आ रही थीं। यह तस्वीर उनके अटूट समर्पण का सबसे बड़ा सबूत थी।
23 साल की उम्र में रचा इतिहास: गांव से लेकर सीएम तक ने दी बधाई
मेहनत कभी बेकार नहीं जाती और श्रीपति ने इसे सच साबित कर दिखाया। उन्होंने TNPSC की परीक्षा पास कर ली और महज 23 साल की उम्र में सिविल जज बन गईं।
जैसे ही यह खबर उनके गांव पहुंची, वहां खुशी की लहर दौड़ गई। गांव वालों ने ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ अपनी इस बेटी का शानदार स्वागत किया। यह सिर्फ श्रीपति की जीत नहीं थी, बल्कि पूरे ‘मलैयाली’ आदिवासी समुदाय की जीत थी। उनकी इस सफलता की गूंज पूरे राज्य में सुनाई दी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने भी सोशल मीडिया पर श्रीपति की जमकर तारीफ की और इसे महिलाओं और पिछड़े वर्ग के लिए एक बड़ी प्रेरणा बताया।
श्रीपति की कहानी हमें यह सिखाती है कि अगर इंसान के अंदर कुछ कर गुजरने की आग हो, तो गरीबी, दूर-दराज का गांव या कोई भी शारीरिक तकलीफ उसे रोक नहीं सकती। एक ट्रक ड्राइवर की पत्नी और एक नवजात बच्ची की मां ने पूरे देश के सामने यह साबित कर दिया है कि बहाने बनाने वाले तो छोटी-छोटी बातों पर हार मान लेते हैं, लेकिन जीतने वाले हर मुश्किल को सीढ़ी बना लेते हैं। आज श्रीपति लाखों युवाओं और खासकर उन बेटियों के लिए एक रोल मॉडल हैं, जो अपने सपनों को सच करना चाहती हैं।











