अयोध्या के राम मंदिर में पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायणन द्वारा दान की गई 5 करोड़ रुपये की सोने की ‘श्रीरामचरितमानस’ के गायब होने की अफवाहों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूरी तरह विराम लगा दिया है। ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव ने सोमवार (6 जुलाई) को स्पष्ट किया कि यह पवित्र और बहुमूल्य ग्रंथ पूरी तरह सुरक्षित है और सुरक्षा कारणों से इसे मंदिर के सुरक्षित लॉकर (स्ट्रॉन्ग रूम) में रखा गया है।
पूर्व केंद्रीय गृह सचिव ने जताई थी चिंता
यह पूरा मामला तब गरमाया जब सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एस. लक्ष्मीनारायणन ने इस बात पर सार्वजनिक रूप से चिंता जताई कि उनके परिवार द्वारा अप्रैल 2024 में दान की गई सोने की ‘श्रीरामचरितमानस’ को मंदिर से हटा दिया गया है। लक्ष्मीनारायणन का कहना था कि शुरुआत में इस पवित्र ग्रंथ को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया था और रोज इसकी पूजा होती थी, जिससे वे बहुत खुश थे। हालांकि, करीब पांच महीने तक प्रदर्शित किए जाने के बाद इसे अचानक वहां से हटा दिया गया। उन्होंने मंदिर प्रशासन और सरकार से इसकी सुरक्षा व पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ऑडिट कराने की मांग की थी।
इस पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पहले ही उन्हें सूचित किया था कि मंदिर में आने वाले हर चढ़ावे को हमेशा के लिए प्रदर्शित नहीं किया जा सकता है। ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव ने अब स्पष्ट कर दिया है कि लक्ष्मीनारायणन जब भी चाहें मंदिर आकर स्वयं इस पवित्र ग्रंथ को देख सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस भेंट का पूरा विवरण और रिकॉर्ड मंदिर के आधिकारिक रजिस्टर में पूरी पारदर्शिता के साथ दर्ज है, इसलिए इसकी सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का संदेह बेबुनियाद है।
इसलिए बेहद खास और बहुमूल्य है सोने की रामचरितमानस
इस अनमोल और पवित्र ग्रंथ की भव्यता का अंदाजा इसकी अनूठी बनावट से लगाया जा सकता है। इस ‘श्रीरामचरितमानस’ के सभी 10,902 श्लोकों को 140 किलोग्राम वजनी तांबे के पन्नों पर बेहद खूबसूरती से उकेरा गया है। इसके बाद इन तांबे के पन्नों को 24-कैरेट शुद्ध सोने के पानी में डुबोया गया है। इसके अलावा, ग्रंथ के एक-एक अक्षर को जड़ने के लिए लगभग 5 से 7 किलोग्राम शुद्ध सोने का इस्तेमाल किया गया है।
इस अद्भुत और ऐतिहासिक कलाकृति को देश के प्रसिद्ध ‘वुम्मिडी बंगारू ज्वेलर्स’ (Vummidi Bangaru Jewellers) ने तैयार किया है। इस ज्वेलरी फर्म को नए संसद भवन के ऐतिहासिक राजदंड ‘सेंगोल’ को भी डिजाइन और निर्मित करने का गौरव प्राप्त है।
चढ़ावा चोरी विवाद के बीच फैली थीं गायब होने की अफवाहें
सोने की रामचरितमानस गायब होने से जुड़ी यह अफवाहें ऐसे समय में फैलीं जब अयोध्या का राम मंदिर पहले से ही चढ़ावा चोरी के विवाद से जूझ रहा है। मंदिर में चढ़ावे और नकदी की हेराफेरी के आरोपों की जांच उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है।
इस मामले में अब तक मंदिर के दान काउंटिंग प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। चढ़ावे की कथित हेराफेरी के मुद्दे पर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लगातार सरकार और ट्रस्ट प्रबंधन को घेर रहे हैं। इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच इस बहुमूल्य ग्रंथ के हटाए जाने को लेकर अफवाहों ने जोर पकड़ लिया था, जिस पर अब ट्रस्ट के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद विराम लग गया है।
FAQ:
Q1: सोने की रामचरितमानस को अयोध्या राम मंदिर के गर्भगृह के सामने से क्यों हटा दिया गया?
A1: ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कारणों और मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए इस पवित्र ग्रंथ को ट्रस्ट के सुरक्षित लॉकर (स्ट्रॉन्ग रूम) में रखा गया है।
Q2: दानदाता सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एस. लक्ष्मीनारायणन ने इस ग्रंथ को लेकर क्या चिंता व्यक्त की थी?
A2: लक्ष्मीनारायणन ने चिंता जताई थी कि उनके परिवार द्वारा अप्रैल 2024 में दान की गई इस रामचरितमानस को पांच महीने तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखे जाने के बाद अचानक हटा दिया गया था। उन्होंने इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऑडिट की मांग की थी।
Q3: राम मंदिर की सोने की रामचरितमानस की क्या विशेषताएं हैं?
A3: इस पवित्र ग्रंथ के सभी 10,902 श्लोकों को 140 किलोग्राम तांबे के पन्नों पर उकेरा गया है और उन पर 24-कैरेट शुद्ध सोने की परत चढ़ाई गई है। इसके अक्षरों को भी लगभग 5 से 7 किलोग्राम शुद्ध सोने से जड़ा गया है। इसे प्रसिद्ध ‘वुम्मिडी बंगारू ज्वेलर्स’ ने तैयार किया है।













